रविवार, 5 अप्रैल 2026

5 अप्रैल 2026 में प्रकाशित भोजपुरी व्यंग्य

जिल्लत झेलत हवें, फिर भी बोलत हवें 


मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा का हाल बा? बाबा बोललें भ्रमित लोग का गैस के किल्लत बा। देश में गैस के कवनो कमी नईखे। नजर के दोष बा। सबकी पेट में गैस बा। शहर के नाला में गैस बा। होटल रेस्टोरेंट में गैस बा। सरकार की प्रवचन में गैस बा। प्रशासन की वचन में गैस बा। एकरा बाद भी किचेन में चूल्हा बंद बा। हमरा जइसन अंधभक्तन के प्यारा प्रधानमंत्री गैस की किल्लत पर एक शब्द भी ना बोलिहे। उ बंगाल पर बोलिहे जहां उनकर अगिला जन्म होखे वाला बा। उ आसाम पर बोलिहे काहें कि बागान आ चाय से उनकर बचपन से नाता बा। उनकर चेला चपाटी बोलिहन कि दूषित हवा फैला के देश के माहौल खराब कइला में जे लागल बा उ देश द्रोही बा। असल राष्ट्र भक्त गैस फैस के चक़्कर में ना रहेला। 
ईरान -अमेरिका में मार होता त ओहसे हमारा कवन फरक बा?  लेकिन हमरे जिला जवार में चकरा, भागलपुर, भटनी, सोहनपुर, सलेमपुर में जवन मारामारी बा ओकर त बात उठबे करी। घर घर मारा मारी बा। साच हाल इ बा कि मरनी जियनी, काम क्रिया ब्रह्मभोज में भी गैस नईखे मिलत। जवना नेता लोग की मुंह से गैस के बरखा होता जेकरा दिक्क़त होखे ओकरा मुंह में सिलेंडर लगा के गैस के भर के आपन काम चलावल जा।
एतना सुनते पड़ोसी बाबा भड़क गईलें। बोललें कि विरोधी की बहकावा में मत आवs बच्चा। राष्ट्र की साथे रहा। बंगाल - आसाम के चुनाव बीत जायेदा, अबे और खेल आ झमेल सामने आई। 
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रविवार, 29 मार्च 2026

29 मार्च 2026 की अंक में प्रकाशित

मंत्री - नेता, रोये-धोये, अफसर पर नहीं लगाम...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। मलाल येह बात के बा की - "मंत्री - नेता, रोये-धोये, अफसर पर नहीं लगाम...। जनता बैठे माथा पीटे, सूझे न एको काम।।" यूपी में बड़ा कानाफुसी बा। साझे की सरकार में मंत्री भी लाचार हवें। जवना मंत्री का जनता की दुख दर्द पर भी दिल ना पसीजेला उहो मंत्री पुक्का फाड़ फाड़ रोवत हवें। मंत्री जी के आंसू गिल्सरिन लगा के ना निकरत रहे। उ घड़िआली आंसू भी ना रहे। उ बिरादरी के कष्ट देख के करेजा से निकलल हुक रहे। मंत्री जी की रोवला से बिरादरी ओतना दुखित ना भइल जेतना एम पी साहब, मंत्री की आंसू पर ठट्ठा मारत रहलेन। अब एम पी साहब के भी महादेव ही रक्षा करिहै। एम पी साहब का शायद पता ना होखे, उनकी क्षेत्र में जेतना बाभन-ठाकुर-बनिया ना बाड़न ओतना त मंत्री जी के बिरादरी वाला लोग बा। बिरादरी के लोग अपना मंत्री जी के भगवान अइसन मानेला। कबो पैर दबावेला, कबो आरती उतारेला। एमपी साहब, खिल्ली उड़ावत हवा त उड़ा ल, अबकी मंत्री के बिरादरी तोहार नाव डूबा के मानी। दिल्ली के राह छोड़ के फेरु मुंबई न जाएके पर जा। हरहर महादेव, बिरादरी में गुस्सा बहुत बा। अबकी बाबा भी ना बचा पईहें। मुंहे के जब्बर हो गईल बाड़s त अबकी फरिया जाई। मंत्री जी, इहो कहलेन कि कवनो अफसर हमार बतिये नईखे सुनत। अब मंत्री जी के कईसे समझावल जा कि भईया अपनी इहाँ खाली बाबा के चलेला।
एक जने दूसर मंत्री जी हवें। पुलिस विभाग के नौकरी छोड़ के सियासत के चस्का लागल त पार्टी ज्वाइन क लिहले। अगर विभाग में रहितन त येह समय सबसे बड़का पद पर रहितन। एडीजी, आई जी, डीआईजी सलाम ठोकतन। उनकी ईमानदार छवि के बहुत चर्चा रहल। राजनीति में भी समाज के कल्याण ईमानदारी से करे लन। एगो कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचल रहलें। हर मंत्री के प्रोटोकाल होला, लेकिन देखल गईल कि कार्यक्रम में डीएम के का कहल जा एगो कवनो एसडीएम भी ना पहुंचले। ईमानदार आ स्वछ छवि वाला मंत्री जी के स्वाभिमान जागल, कार्यक्रम छोड़ के चल दिहले। ठीके कहल गईल बा - आवत ही हरसे नहीं, नैनन नहीं स्नेह। तुलसी वहाँ ना जाईये, कंचन बरसत मेह। 
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रविवार, 1 मार्च 2026

1 मार्च 2026 क़ी अंक में प्रकाशित


इनकर लहंगा उठी अब रिमोट से...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। होली आईल बा। मन फगुआईल बा। बाबा लोग भी बब्बर हो गईल बा। मुंहे के जब्बर हो गईल बाड़न। भंग के रंग अइसन चढ़ल बा  कि एगो भगवा दूसरका भगवा के भगही खोल के नंगा कईला में लागल बा। चारों ओर से सनातन पर हमला बा। इ हमला कवनो चेकदार हरियर लुंगी वाला ना, नारंगी लुंगी वाला ही  कईले बाड़न । जेतना धर्म के ठेकेदार लोग बा, मुंह में दही जमा के मौनी बाबा बनल बा लोग। ठट्ठा उड़त बा। लुग्गा लुटाता। इज्जत बांस की पुलईं टंगा गईल बा। केकर- केकर नाम लेई, जईसन उदई ओइसन भान...।
  विश्व में रंग के ना बारूद के होली होता। अमेरिका आ इजराईल दुनो ईरान पर हमला सत्तर जने के होलिका जला दिहलेँ। पिचकारी के बात छोड़ी मिसाईल के बात बतिआईं। मौत के मातम की बीचे आंध्र प्रदेश में पटाखा फैक्ट्री में अस पटाखा दगल की 21 जने मर गईलेन। सब मजूर रहलें। रोटी खातिर मजबूर रहलेन। केहू हजूर थोड़े मरल बा की नेता लोग का कवनो दुख होई। 
देश में यूजीसी पर बोलला में सवर्ण नेता लोग का लाज लागत बा। कुछ बाबा लोग बोलत बा। जेईसे लखनऊ में शनीचर की दिने ब्राह्मण महासभा की बैठक में मिसिर,  पाठक,  अग्निहोत्री,  पांडेय  त पक्ष -विपक्ष में बेसी बेसी बोल दिहल लोग लेकिन जब  शर्माजी बोले खड़ा भइलें त अस लिहो लिहो भईल की लगल होली आ गईल। बाभन देवता लोग त पहिलहि से शंकराचार्य बाबा की विवाद पर भितरे भीतर डहुरत बा लोग ऊपर से आयोजन के मुखिया त्रिपाठी प्रबुद्ध समागम की नाम पर  लोग के जुटान करा के सवाल खड़ा क दिहलेँ कि शंकराचार्य की अपमान पर सरकार संज्ञान काहे नईखे लेत?  पाठक दावा करते रहि गईलेन कि सरकार ब्राह्मण समाज क़ी साथे बा, लेकिन बाबा लोग के अखियाँ लाले लाल, अखिया लाले लाल...। भईल बवाल। नारेबाजी से लगल कई जने नेता लोग क़ी पैजामा के नाड़ा ढील हो जाई। अब त सब गावत बा -इनकर लहंगा उठा देईब रिमोट से..।
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रविवार, 25 जनवरी 2026

25 जनवरी 2026 की अंक में प्रकाशित भोजपुरी व्यंग्य

"बाबागर्दी"की गुमान में मचल बा गर्दा गर्दा 
मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें-हाल त बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। तीरथराज प्रयाग में राजनीति के चकरगति भईल बा। हिन्दू एकता के बात करत- करत हिन्दू लोग ही दु फाड़ हो गईल। कुछ शंकराचार्य के समर्थन त कुछ सरकार के समर्थक। सनातन के अइसन उपहास सनातनी राज में ही देखे के मिलला पर बड़ा कष्ट होता। मौनी अमवस्या से लेके सात दिन में भगवा भिड़ंत की आपसी दम्भ और अहंकार में आस्था के अस्थि विसर्जन पर लागल संत समाज हिन्दू समाज के केतना भला करता? रउरा खुद देखीं। सनातन के नारा रहे - धर्म की जय हो। कवना धर्म के जय कईल जा? जवना धर्म में नियम कानून की मर्यादा के तोड़ल जाता । दूसरका नारा ह - अधर्म का नाश हो। सनातनी सरकार बा आ ब्रह्मचारी बालकन के चोटी उखाड़ के, लँगोटी खोल के पीटे वाला अधर्मी पर कार्रवाई नईखे होत त अधर्म के नाश कईसे होई?  तीसरा नारा ह -प्राणियों में सदभावना हो। जब साधु ही साधु से लड़त बाड़न, एक दूसरा के नीचा दिखावला में लागल बाड़न त सद्भावना कहां रह गईल? विश्व के कल्याण के बात का होई ज़ब हिन्दू समाज में ही विघटन करे वाला कईगो कालनेमि दुनो ओर भेष बदल के छल खातिर आपन -आपन जाल बिछवले बाड़न। <br>माघ महोत्सव के पुण्य क्षेत्र में भगत प्राणी शांति खोजत बा। साधु संत लोग भी सादगी त्याग, सेलिब्रेटी सुख लुटता। मंचन से वैराग्य के प्रवचन करे वाला बाबा लोग अपने त राग से विरत ना होत हवें आ भोली भाली जनता के राग द्वेष से मुक्ति के प्रवचन देत हवन। साधु की अनुचित क्रोध से अनर्थ होता। अहंकार एतना प्रबल बा कि जीवन में पछतावा से अधिका कुछ हासिल ना होई। धर्मरक्षा की लड़ाई में उहो दौड़ल आके पीठ सुघरावता जवन अपनी समय में लाठी से पीठ लाल करा देले रहे। सच्चा इंसान के हृदय में क्षोभ बा। भगत धर्मसंकट पड़ल बा। कवना ओर से खड़ा होखल जा ज़ब दुनो ओर हमरे अराध्य हवन। एक तरफ क्रोधातुर वाणी त दूसरा तरफ क्रोधातुर व्यवहार बा। दुनो ओर हठ बा। जब केहू झुके के तैयार ही ना बा त भगत के दिल दुख के दरिया बहबे करी। प्रयागराज की घटना के सच्चा भगत ना अनुमोदन करत हवें ना प्रतिकार। रात में दुख दूना तब हो गईल जब कुछ नवहा बुलडोजर बाबा जिन्दावाद के नारा लगावत संत जी की शिविर पर चढ़ गईलेन। सीसीटीवी लागल बा, वीडियो वायरल बा। लेकिन वाह रे मेला प्रशासन! कहीं कानून तोड़ला पर टूट पड़लें आ कहीं अराजकता पर छूट करेलें। 
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रविवार, 11 जनवरी 2026

11 जनवरी 2026 के अंक में प्रकाशित

गाँव- गाँव दारू बिक रहल बा, दूध बटल अपराध 

मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें-हाल त बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। माघ मकरगति भईल बा। राजनीति चकरगति भईल बा। गाँव- गाँव दारू के ठेका खुल गईल। बेचेवाला मालमाल आ पिये वाला कंगाल हो गईले। बिहार में दारू बंद भईल त यूपी वालन के रोजगार खुल गइल। जवना की लगे टूटही साईकिल ना रहे आज फरचूनर से घुमत बा। ओकरा कोठी कटरा करेंसी के बहार हो गईल, जबसे ओकरा शराब के कारोबार हो गईल। ओकर एक टांग यूपी में त दूसरका बिहार हो गईल। अब येह ठंडी में भी एक खेप बिहार पार कराके आराम से रजाई तान के सुतल बा। चारों तरफ ओकर बाजा बाजि गईल, उ राजा  हो गईल। साँच कहल बा - रजाई वाला राजा, कंबल वाला सोये। दोहरी वाला किकुरी मारे, चदरा वाला रोये। सरकार के कानून व्यवस्था में रोजे सेन्हि लगाके दनादन दारू हेलववला के कारोबार बिहार से सटल जिलन में खूब फलत-फूलत बा। नवहा बेरोजगारन के रोजगार मिल गईल बा। आबकारी विभाग के इनकम बढ़त बा, एही से कठोर कार्रवाई की जगह लचिला रुख अख्तियार कईल जाता। सीमा के थानेदारन के कमाई भी बढ़ल बा। कार्रवाई की नाम पर कबो कबो ज़ब सेटिंग नइखे हो पावत त चाप दिहल जाता। जब सेटिंग हो जाता तब आवs जा घर अपने हs। सरकार के जांच एजेंसी विरोधी दल की नेतन के घर खोनला में लागल बा। बेरोजगार लोग के आय के जांच करा दीं आँख के पट्टी खुल जाई। ज़ब कवनो काम धंधा नोकरी चकरी हइये नईखे त कहां से चरपहिया चलत बा। एकर जाँच ना होई। काहें की एकर जाँच होई त नेतन की आगे पीछे जिन्दावाद जिन्दावाद के करी? नेतन के राजनीति की चश्मा से ओहिजा बवाल दिखी जहां चुनाव होखे वाला होई । अब पश्चिम बंगाल में चुनाव बा त बंगलादेश के अत्याचार से अख़बार भरल मिलत बा । अब अख़बारवालन का भी चीन, पाकिस्तान श्रीलंका ना लउकी। अब टीवी की स्क्रीन पर छउक -छउक के बंगला देश देखावल जाई। 
राजनीति के भी आपन नजरिया होला। कहां ताके के बा, कहां झाँके के बा, आ कहां आँख बंद क लेबे के बा  ओकर अलग अलग चश्मा बा। प्रयागराज में माघ मेला लागल बा। कल्पवास करे वाला लोग त पुन्य कमाते बा एक जने दूधिया भाई सोचलेन मुफ्त के दूध दान क के कुछ पुन्य हमहूँ बिटोर लीं। बाकी त सालो साल गंगा माई की कृपा से दूध के धंधा चलते रही। माघ मेला में मुफ्त के दूध बांटे गईलेन त पुलिस पीछे पड़ गईल। पकड़ के झूसी थाने ले गईल। मुफ्त के दूध बांटे वाला भूसी ना दिहलेँ, काहे की कवनो चोर डाकू त रहलें ना उ नेता रहलें नेता। सांझ ले छूट गईलन। सवाल इ बा कि ओही मेला में किलो के किलो गांजा फूंकाता उ नाहीं मेला पुलिस के देखाता। 
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रविवार, 4 जनवरी 2026

4 जनवरी 2026 की स्वाभिमान जागरण के अंक में प्रकाशित

ई -दई घाम करs, सुगवा सलाम करs...

मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। धुंध छवले बा, कुहेसा पड़त बा। शीतलहर चलता। लइकाई में गावत रहलीं जा - "दई -दई घाम करs, सुगवा सलाम करs...तोहरी बलकवा के जड़वत बा। पुअरा फूंकी फूंकी तापत बा।"आजकल पुअरा त खेतवे में धान कटते फूंका जाता। पूस-माघ के महीना में लवना, लेहना, तेवना तीनों के अकाल चलत रहे। अब समय बदल गईल। कबो जमाना रहल, हम्मन के पुरखा पुरनिया गुलाम रहल। आजादी की लड़ाई में अपनी नगर के बहुत योगदान रहल। खजड़ी वाला भागवत भगत ज़ब गावत रहलें -गेहूआ के रोटिया रहरिया के दलिया तनी घियुवा मिलिहे ना, जब अइहे अजदिया तानि घियुवो मिलिहे ना। देश आजाद भईल त लोग एतना आजाद भईल की सड़क आ रेल लाइन की किनारे कवनो सरकारी जमीन पर मंदिर, मस्जिद, मजार बना के आपन आपन   समराज्य फैलावल शुरू कईलेन। अपना नगर में भी अइसही एगो जमीन पर मरला की बाद एक जने दफना दिहल गईले। उ भले जमीन में दफ़न रहलें उनकर साम्राज्य बढ़त गईल। सत्तर बरिस में क़ब्र पर आस्था के मेला आ मनौती की बहार में कब्र मजार बन गईल। मजार पर मन्नत की मंगन में हिन्दू मुसलमान सब बटोरात रहलेन। मजार की जमीन के विवाद में नगीना पहलवान मरा गईलन। समय बदलल। सियासी माहौल बदलल। अब गाड़ल मुर्दा उखाड़ शुरू भईल। जड़ खोजाईल त जमीन सरकारी निकलल। मजार पर लागे वाला मेला पर प्रतिबंध लाग गईल। येह साल कवनो दउरी दोकान प्रशासन ना लागे दिहलसि। जवना जगह पर मेला के रेला लागत रहे ओहिजा खाली पुलिस के झमेला देखल गईल। कागज़ पत्तर में मजार से बंजर दर्ज हो गईल। 
नेताजी जंग छेड़ देले बाड़न। जमीन बंजर बा त मजार पर बुलडोजर चलावे के मांग करत बाड़न। भीषण ठण्ड में माहौल गरम बा। ना जने कहिया दइब उगिहे। उजियार होई। लेकिन अबे मौसम में ही ना प्रशासनिक अमला में भी धुंध छवले बा। ठंड घेरले बा। लोग किकुरल बा। अब पता न इ दईब के एजेंडा ह की राजनीति के प्रोपोगंडा ह, लेकिन कुछ त ह। 
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हम अपनी ब्लॉग पर राउर स्वागत करतानी | अगर रउरो की मन में अइसन कुछ बा जवन दुनिया के सामने लावल चाहतानी तअ आपन लेख और फोटो हमें nddehati@gmail.com पर मेल करी| धन्वाद! एन. डी. देहाती

अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद