रविवार, 12 अप्रैल 2026

12 अप्रैल 2026 की अंक में प्रकाशित

लाख रुपया पगार बा, त हजार गो काम बा 
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बड़ा बेहाल बा। कहीं स्कूल में सुखार बा, कहीं स्कूल में बहार बा। गार्जियन लाचार बा। जेकरा दु चार ठे छोट बच्चा होवे ओकर बंटा ढार बा। सरकारी स्कूल में सब फ्री बा, कॉपी -किताब, कपड़ा लत्ता, भोजन पताई लेकिन एगो चीज नईखे, जवना के नाम ह पढाई। अगर साचो सरकारी स्कूल में पढ़ाई रहित त ओही सरकारी स्कूल के मास्स साहब अपनी बेटवा के प्राइवेटवा में दाखिला ना करइतन। लोग कहता कि सरकारी स्कूल की मास्टर से लाख रुपया पगार बा। अरे भाई इहो त देखीं उनकी लगे हजार को सरकारी काम बा। जब सरकार चाहें जहां नाध दे। प्राइवेट के हाल उ बा जेईसे बड़े बड़े माॉल। एक ही छत के नीचे कई प्रकार के ब्यापार। अपनी बच्चा के दाखिला कराई, सीधे कल्लटर बना के छोड़िहे। बारहों महीना एडमिशन ओपेन बा। नाम लिखवाई। कई हजार के कॉपी किताब ले जाई। कई हजार के ड्रेस ले जाईं। जूता मोजा, टाई सब ओहिजा बिकाई। गनीमत बा अबे रेस्टोरेंट नईखे खुलल ना त बबुआ के टिफिन भी घर से ना जाइत। घर से बस आई जाई। लईका ले आईं सीधे कल्लटर बनायीं। हाइस्कूल फेल स्कूल की निदेशक की येह मॉल पर पांच हजार पगार के नौकर रउरी लेडिकन के एकदम पढा लिखा के टंच क दिहे। कुछ कमी बेसी होई त घरही ट्यूशन लगवा दीं। 
सरकार लगातार शिक्षा में सुधार के झाल बजावत बा। मुफ्त शिक्षा के व्यवस्था बा। सरकारी स्कूल में योग्य शिक्षक बाड़न। लाख रुपया से ऊपर पगार बा, लेकिन पढ़ाई अइसन की गाँव गाँव में खुलल सरकारी स्कूल में उहे लड़िका पढ़े जात हवें जेकर माई -बाबू गरीब बाड़न। बाकी ज्यादातर सामान्य परिवार के लड़िका त प्राइवेट में ही पढ़ता। सरकार के येह प्राइवेट स्कूल पर कवनो नियंत्रण नईखे। अधिकारी से लेके नेता तक सबकी जेब में कुछ न कुछ लाभान्स जाता। अख़बार के भी पेट भरता, खूब विज्ञापन छपत बा। सालोसाल त मॉल से माल मिलते बा। पंद्रह अगस्त आ छब्बीस जनवरी के विशेष रूप से पत्रकार लोग भी बहत गंगा में हाथ धोवत हवें।
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रविवार, 5 अप्रैल 2026

5 अप्रैल 2026 में प्रकाशित भोजपुरी व्यंग्य

जिल्लत झेलत हवें, फिर भी बोलत हवें 


मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा का हाल बा? बाबा बोललें भ्रमित लोग का गैस के किल्लत बा। देश में गैस के कवनो कमी नईखे। नजर के दोष बा। सबकी पेट में गैस बा। शहर के नाला में गैस बा। होटल रेस्टोरेंट में गैस बा। सरकार की प्रवचन में गैस बा। प्रशासन की वचन में गैस बा। एकरा बाद भी किचेन में चूल्हा बंद बा। हमरा जइसन अंधभक्तन के प्यारा प्रधानमंत्री गैस की किल्लत पर एक शब्द भी ना बोलिहे। उ बंगाल पर बोलिहे जहां उनकर अगिला जन्म होखे वाला बा। उ आसाम पर बोलिहे काहें कि बागान आ चाय से उनकर बचपन से नाता बा। उनकर चेला चपाटी बोलिहन कि दूषित हवा फैला के देश के माहौल खराब कइला में जे लागल बा उ देश द्रोही बा। असल राष्ट्र भक्त गैस फैस के चक़्कर में ना रहेला। 
ईरान -अमेरिका में मार होता त ओहसे हमारा कवन फरक बा?  लेकिन हमरे जिला जवार में चकरा, भागलपुर, भटनी, सोहनपुर, सलेमपुर में जवन मारामारी बा ओकर त बात उठबे करी। घर घर मारा मारी बा। साच हाल इ बा कि मरनी जियनी, काम क्रिया ब्रह्मभोज में भी गैस नईखे मिलत। जवना नेता लोग की मुंह से गैस के बरखा होता जेकरा दिक्क़त होखे ओकरा मुंह में सिलेंडर लगा के गैस के भर के आपन काम चलावल जा।
एतना सुनते पड़ोसी बाबा भड़क गईलें। बोललें कि विरोधी की बहकावा में मत आवs बच्चा। राष्ट्र की साथे रहा। बंगाल - आसाम के चुनाव बीत जायेदा, अबे और खेल आ झमेल सामने आई। 
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रविवार, 29 मार्च 2026

29 मार्च 2026 की अंक में प्रकाशित

मंत्री - नेता, रोये-धोये, अफसर पर नहीं लगाम...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। मलाल येह बात के बा की - "मंत्री - नेता, रोये-धोये, अफसर पर नहीं लगाम...। जनता बैठे माथा पीटे, सूझे न एको काम।।" यूपी में बड़ा कानाफुसी बा। साझे की सरकार में मंत्री भी लाचार हवें। जवना मंत्री का जनता की दुख दर्द पर भी दिल ना पसीजेला उहो मंत्री पुक्का फाड़ फाड़ रोवत हवें। मंत्री जी के आंसू गिल्सरिन लगा के ना निकरत रहे। उ घड़िआली आंसू भी ना रहे। उ बिरादरी के कष्ट देख के करेजा से निकलल हुक रहे। मंत्री जी की रोवला से बिरादरी ओतना दुखित ना भइल जेतना एम पी साहब, मंत्री की आंसू पर ठट्ठा मारत रहलेन। अब एम पी साहब के भी महादेव ही रक्षा करिहै। एम पी साहब का शायद पता ना होखे, उनकी क्षेत्र में जेतना बाभन-ठाकुर-बनिया ना बाड़न ओतना त मंत्री जी के बिरादरी वाला लोग बा। बिरादरी के लोग अपना मंत्री जी के भगवान अइसन मानेला। कबो पैर दबावेला, कबो आरती उतारेला। एमपी साहब, खिल्ली उड़ावत हवा त उड़ा ल, अबकी मंत्री के बिरादरी तोहार नाव डूबा के मानी। दिल्ली के राह छोड़ के फेरु मुंबई न जाएके पर जा। हरहर महादेव, बिरादरी में गुस्सा बहुत बा। अबकी बाबा भी ना बचा पईहें। मुंहे के जब्बर हो गईल बाड़s त अबकी फरिया जाई। मंत्री जी, इहो कहलेन कि कवनो अफसर हमार बतिये नईखे सुनत। अब मंत्री जी के कईसे समझावल जा कि भईया अपनी इहाँ खाली बाबा के चलेला।
एक जने दूसर मंत्री जी हवें। पुलिस विभाग के नौकरी छोड़ के सियासत के चस्का लागल त पार्टी ज्वाइन क लिहले। अगर विभाग में रहितन त येह समय सबसे बड़का पद पर रहितन। एडीजी, आई जी, डीआईजी सलाम ठोकतन। उनकी ईमानदार छवि के बहुत चर्चा रहल। राजनीति में भी समाज के कल्याण ईमानदारी से करे लन। एगो कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचल रहलें। हर मंत्री के प्रोटोकाल होला, लेकिन देखल गईल कि कार्यक्रम में डीएम के का कहल जा एगो कवनो एसडीएम भी ना पहुंचले। ईमानदार आ स्वछ छवि वाला मंत्री जी के स्वाभिमान जागल, कार्यक्रम छोड़ के चल दिहले। ठीके कहल गईल बा - आवत ही हरसे नहीं, नैनन नहीं स्नेह। तुलसी वहाँ ना जाईये, कंचन बरसत मेह। 
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रविवार, 1 मार्च 2026

1 मार्च 2026 क़ी अंक में प्रकाशित


इनकर लहंगा उठी अब रिमोट से...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। होली आईल बा। मन फगुआईल बा। बाबा लोग भी बब्बर हो गईल बा। मुंहे के जब्बर हो गईल बाड़न। भंग के रंग अइसन चढ़ल बा  कि एगो भगवा दूसरका भगवा के भगही खोल के नंगा कईला में लागल बा। चारों ओर से सनातन पर हमला बा। इ हमला कवनो चेकदार हरियर लुंगी वाला ना, नारंगी लुंगी वाला ही  कईले बाड़न । जेतना धर्म के ठेकेदार लोग बा, मुंह में दही जमा के मौनी बाबा बनल बा लोग। ठट्ठा उड़त बा। लुग्गा लुटाता। इज्जत बांस की पुलईं टंगा गईल बा। केकर- केकर नाम लेई, जईसन उदई ओइसन भान...।
  विश्व में रंग के ना बारूद के होली होता। अमेरिका आ इजराईल दुनो ईरान पर हमला सत्तर जने के होलिका जला दिहलेँ। पिचकारी के बात छोड़ी मिसाईल के बात बतिआईं। मौत के मातम की बीचे आंध्र प्रदेश में पटाखा फैक्ट्री में अस पटाखा दगल की 21 जने मर गईलेन। सब मजूर रहलें। रोटी खातिर मजबूर रहलेन। केहू हजूर थोड़े मरल बा की नेता लोग का कवनो दुख होई। 
देश में यूजीसी पर बोलला में सवर्ण नेता लोग का लाज लागत बा। कुछ बाबा लोग बोलत बा। जेईसे लखनऊ में शनीचर की दिने ब्राह्मण महासभा की बैठक में मिसिर,  पाठक,  अग्निहोत्री,  पांडेय  त पक्ष -विपक्ष में बेसी बेसी बोल दिहल लोग लेकिन जब  शर्माजी बोले खड़ा भइलें त अस लिहो लिहो भईल की लगल होली आ गईल। बाभन देवता लोग त पहिलहि से शंकराचार्य बाबा की विवाद पर भितरे भीतर डहुरत बा लोग ऊपर से आयोजन के मुखिया त्रिपाठी प्रबुद्ध समागम की नाम पर  लोग के जुटान करा के सवाल खड़ा क दिहलेँ कि शंकराचार्य की अपमान पर सरकार संज्ञान काहे नईखे लेत?  पाठक दावा करते रहि गईलेन कि सरकार ब्राह्मण समाज क़ी साथे बा, लेकिन बाबा लोग के अखियाँ लाले लाल, अखिया लाले लाल...। भईल बवाल। नारेबाजी से लगल कई जने नेता लोग क़ी पैजामा के नाड़ा ढील हो जाई। अब त सब गावत बा -इनकर लहंगा उठा देईब रिमोट से..।
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