रविवार, 24 मई 2026

24 मई 2026 के अंक में प्रकाशित

कहवां ना बाड़न तेलचट्टा...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। चारों ओर कॉकरोच, चारो ओर तेलचट्टा। तिलचट्टा और तेलचट्टा में बहुत महीन अंतर बा। दोनों के इतिहास पुरातन बा। तिलचट्टा का जन्म के जनम लगभग 30 से 35 करोड़ वर्ष पूर्व मतलब डायनासोर से भी पहले भईल रहे। हम भाग्यशाली हईं कि यह जीव के पहिला उतपत्ति हमरे देश में भईल रहे। घर की कोने अंतरे, लगभग हर सरकारी आफिस में फाईल चाटत, कुरसी मेज की नीचे भागत तिलचट्टा के बहुत देखल गईल। वर्ष 2026 तिलचट्टन के ऐतिहासिक वर्ष साबित भईल। पूरा दुनिया तेलचट्टन की शोर से सराबोर बा। देश में नौतपा चलत बा, लोग लू से डरल बा लेकिन सबकर मोबाईल तेलचट्टन से भरल बा। देश में तमाम गणना होला। जनगणना, बाल गणना, पशु गणना, साक्षर-निरक्षर गणना जेकरे खातिर तमाम कर्मचारी लगावल जालें। लेकिन देश में पहिला बेर तिलचट्टा गणना हो गईल। इ गणना भाजपा जईसन बड़वर पार्टी की ऑन लाइन फॉलोअर से बढ़ गईल। जन गणना में 33 सवाल के जवाब देबे के परेला लेकिन तिलचट्टा गणना में बस एक क्लिक और हो गयी गणना।
अमूमन तिलचट्टा के उमर एक से दो वर्ष होला, लेकिन कुछ विशेष प्रजाति के तिलचट्टा पांच वर्ष तक जियेंले। देश में कुछ खलिहर लोग बा, एक जने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से पेज बनवले त चारे दिन में एक करोड़ नब्बे लाख फॉलोवर्स हो गईले। ओकरा बाद सोशल मीडिया पर खलिहर लोग तमाम पार्टी बनाके स्वयं भू जिलाध्यक्ष बने लगले। हिट जनता पार्टी, छिपकली जनता पार्टी, गिरगिट जनता पार्टी...आदि आदि पार्टी। देश में मूल मुद्दा महंगाई, तेल संकट, गैस संकट, बेरोजगारी पर बहस कईला की जगह पर तेलचट्टा  खाली तिलचट्टा पर बहस करत हवें।
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीँ रफ्ते-रफ्ते...


रविवार, 17 मई 2026

17 मई 2026 की अंक में प्रकाशित

मीतऊ! हमहूँ देश भक्त हईं ....
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -बड़ा बवाल बा। महंगाई से मरत आम आदमी के जियल मोहाल बा। ऊपर से हाल इ बा कि कुछ बोल देईब त अंध भक्त भाई लोग झट्ट से देश द्रोही बता देई।  
अरे मीतऊ! हमहूँ देश भक्त हईं ....। जवन देखिला उहे लिखिला। 
देश में महंगी बढ़े त रउरा त्यागी बन जाईं। ना बन पाईं तबो देखाई कि हम त्याग करत हईं। जवना देश में 80 करोड़ लोग सरकार की मुफ्त की राशन पर जियत बा, ओही देश में कार आ कोठी वाला भी कोटेदार की इहा से राशन लेजाके दुकान पर बेच के नकदी बना लेत बा। देश में त्याग के नमूना भी अजबे अजबे लउकत बा। लोग इनोवा से जाता। फारचूनर से जाता। बस में, इ रिक्शा में बैठला पर फोटो खिचवावत बा,भले ओकर इनोवा और फारचूनर बस की पीछे पीछे खलिहे आवत बा रहे। लेकिन त्याग देखावल जाता। ईधन बचावत बा। 
देश में भाषण बा - वन नेशन। सिस्टम दू तरह के बा। 
आम आदमी से सोना खरीदला के मनाही कईल जाता। अब भला बताईं येह महंगी में सोना खरीदे के औकाते केकरा लगे बचल बा? तनी उनकी बारे में बोलीं-जे विदेश में जाके 200 करोड़ के हीरा जड़ाईल ब्लाउज के प्रदर्शन करत हई। पश्चिम बंगाल में जवना नेताजी की घरे सोने के गहना ही ना, पलंग बा सोने के, सोने खातिर। सोना देखे के बा त राजनेता, फ़िल्म अभिनेता, उद्योगपति की इहा देखीं। आम मनई त एगो मंगलसूत्र आ मेहरी के कान के बाली खातिर रोज घर से गाली सुनत बा।
देश के अर्थ व्यवस्था मजबूत करे के बा त जेईसे आम आदमी के मोबाईल मात्र तीन सौ में 28 दिन वाला महीना लगातार चलत बा वइसेही नेता आ मंत्री के चले के चाहीं। एम पी साहब के काहें साढ़े 12 हजार महीना मोबाईल खर्चा खातिर दिहल जाता? विधायक जी के 9 हजार रुपया काहें दिआता? तनी इहो सब त्याग देखा देऊ। तीन सौ में ही मोबाईल चला लेऊ। हंसी त तब आवत बा ज़ब दूसरा के बचत के ज्ञान देबे वाला महामानव जी खुदे लाखों के शूट दिन में ही तीन बेर बदलत हवें। कवने ना शास्त्री जी दुइगो धोती पर साल गुजार देत रहलें। कबो इहो सोचल कईल जा।
आपन हाल का बताईं। अंध भक्त बनला की चक़्कर में वाहन छोड़ के चार दिन पैदल का चल दिहलीं, लू लाग गईल, अब तबियत खराब बा। चार सौ के तेल बचवली तवन चार सौ डॉक्टर ले गईल। आ रहल बात विरोधिन के , त प्रधान सेवक जी वाहन के कम प्रयोग के बात कईलन त हमरी इहाँ के एगो सेवक जी जवन पहिले ऐके गाड़ी से घूमत रहलें उ अब पांच गो वाहन से चलत हवें। 
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीँ रफ्ते-रफ्ते...

रविवार, 10 मई 2026

10 मई 2026 के अंक में प्रकाशित

अब पंजाब के बारी बा..
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। पंजाब के लेके मलाल बा। दिल्ली, बिहार, बंगाल की बाद अब पंजाब के ही बारी बा। ज़ब तक पूरा भारत पर कब्जा ना हो जाई दिल में चैन नईखे।
पंजाब में एगो प्रचलित कहावत ह -"जिद्दी कोठी ते दाने, ओहदी कमली वी सयाने"। एकर अर्थ ह -अर्थ ह की जेकरा घर में समृद्धि  धन (अनाज) बा ओकर बेवकूफ बेटवा भी दुनिया के लिए समझदार (सयान) मानल जाला। त सयान नेताजी कई राज्य में दूसर दल की नेता लोग के कुरसी छीन के पंजाब के कुरसी छिनला की तैयारी करत बाड़न। कल से, छल से, बल से, चाहें कौनो कौशल से पंजाब पर मार्च 27 की बाद आपन झंडा डंडा लहरा देबे के बा। अब हमसे उ का टकराई - जेकरा "पल्ले नई धेला, करदी मेला-मेला"। "आम आदमी पार्टी" की जेब में फूटी कौड़ी नईखे, एगो पंजाब पर एतना गुमान बा। नाम जेकर भगवन्त सिंह मान बा। दिल्ली में केजरी, बिहार में चाचा आ बंगाल में दीदी की बाद अब भगवन्त भईया ही निशाना पर हवें। एगो कहावत ह -"साड्डी न बुलाई, मैं लाढ़े दी ताई"। केहू बुलाई चाहे ना बुलाई हम हर जगह पहुंच जाईब। अबहिन बंगाल के झालमुडी आ मछरी भात के कमाल पूरा देश देखल। अब मक्का के रोटी आ सरसों के साग देखीं। भाँगड़ा नृत्य देखीं। सलवार समीज पर पगड़ी के परिधान देखीं। जेइसन देश ओइसन भेष बनाही के परेला। अबकी बाघा बार्डर तक चढ़ाई के आडर बा। सब एजेंसी लगा दिआई। लेकिन पंजाब भी लिआई।
पांच साल से राज सत्ता के सुख से वंचित सुनील जाखड़, परमिन्दर बराड़, अमरिंदर सिंह, चरनजीत सिंह, इंदर इक़बाल आ शीतल अंगुराल में जोश भरल जाई। आम आदमी वालन के तोड़ के आपन खास आदमी बनावल जाई। अबकी आम आदमी के अंतिम दीया बुता के न जाने क्या क्या किया टाइप काण्ड क दिहल जाई।
राजनीति के 'चस्का' अइसन लत ह कि चाय की चुस्की से शुरू होके मुसकी मारत कुर्सी के हवस तक पहुँच जाला। अब पंजाब की लोगन से आपन पुरान नाता बतावल जाई। जनता से रिश्ता जोड़ाई, भले बाद में रिश्ता खस्ता हो जा। वादा के बाज़ार लागी। गप्पन के बिटोर होई। आपन वाशिंग मशीन फेरु काम कईल शुरू क दी। एक से एक दागी के धो के धवल बना दिहल जाई। आ फेर कवनो भ्रष्टाचारी के पीठ ठोक के पवित्र बता दिहल जाई। कुरसी कब्जा के खेल चलत रही। असली मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी पर मौन आ सवर्ण लोग के वोट लेके पूछल जाई -आप हैं कौन?
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीँ रफ्ते-रफ्ते...

रविवार, 3 मई 2026

3 मई 2026 की अंक में प्रकाशित

मुर्गी मरो चाहे मनई, डीजे बाजी त बाजी 
मनबोध मास्टर पूछलें बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें - हाल त बड़ा बेहाल बा। अइसन डेंजर बाजा के प्रचलन बढ़ल की मुर्गी होखे चाहें मनई, यह बाजा से मर जालें लेकिन सरकार यह पर रोक आज तक ना लगवलसि। अखिलेश भईया के सरकार रहे चाहें योगी बाबा के। इ बाजा बाजी त बाजी। कान फाडू संगीत से दहलत करेजा काम कईल बंद क दे त बंद क दे लेकिन बाजा ना बंद होई। सुने में आईल येही डेंजर बाजा जवना के डीजे कहल जाता ओकर आवाज़ 140 मुर्गी ना बर्दाश्त क पवली। संगीत की ऐके धुन में सदा के लिए सुत गईलीं। मुर्गी रहली त मरलो पर उनकर मांस कामे आ गईल। कुछ बरात में कुछ होटल में कमे दाम में खपत हो गईल। आदमी के मांस त कवनो कामे भी ना आई। मुर्गा समाज ही ना मनई समाज के लिए भी इ दिन याद रखल जाई। कमजोर करेजा पर धक्क धक्क लागे वाला इ डीजे बहुत लोकप्रिय भी ह। अब त एकरा आभाव में दुर्गा जी, सरस्वती जी, गणेश जी के विदाई भी सुन लागत बा। तिलक, बरात, परछावन ही ना मटकोड़वा में भी डी जे बाजत बा। लोग के करेजा पर हाथोंड़ी जैसे चोट करे चाहें घन जईसे, जिम्मेदारन की कान में आवाज़ ना जाई। बड़की अदालत भी तेज बजावला पर रोक लगवले बा। लेकिन वाह रे सरकार! ओकरा त डीजे के अवजिये ना सुनाई देत बा, हाँ महजिदे के लाउडस्पीकर से तेज आवाज़ वाला डीजे काहें नईखे सरकार का सुनात? मुर्गा मुर्गी का त मरहि के बा चाहे बाजा से मरें चाहे बिरियानी बन के मरें, लेकिन मनई पर त दया दिखाई। बुढ़ बीमार मनई के डीजे से करेजा हिला के जनि मारी। अइसन घटिया आ कलंकित बाजा पर पूरा रोक लगाई। फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते रफ्ते...
हम अपनी ब्लॉग पर राउर स्वागत करतानी | अगर रउरो की मन में अइसन कुछ बा जवन दुनिया के सामने लावल चाहतानी तअ आपन लेख और फोटो हमें nddehati@gmail.com पर मेल करी| धन्वाद! एन. डी. देहाती

अपना कीमती समय देने के लिए धन्यवाद