अब पंजाब के बारी बा..
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। पंजाब के लेके मलाल बा। दिल्ली, बिहार, बंगाल की बाद अब पंजाब के ही बारी बा। ज़ब तक पूरा भारत पर कब्जा ना हो जाई दिल में चैन नईखे।
पंजाब में एगो प्रचलित कहावत ह -"जिद्दी कोठी ते दाने, ओहदी कमली वी सयाने"। एकर अर्थ ह -अर्थ ह की जेकरा घर में समृद्धि धन (अनाज) बा ओकर बेवकूफ बेटवा भी दुनिया के लिए समझदार (सयान) मानल जाला। त सयान नेताजी कई राज्य में दूसर दल की नेता लोग के कुरसी छीन के पंजाब के कुरसी छिनला की तैयारी करत बाड़न। कल से, छल से, बल से, चाहें कौनो कौशल से पंजाब पर मार्च 27 की बाद आपन झंडा डंडा लहरा देबे के बा। अब हमसे उ का टकराई - जेकरा "पल्ले नई धेला, करदी मेला-मेला"। "आम आदमी पार्टी" की जेब में फूटी कौड़ी नईखे, एगो पंजाब पर एतना गुमान बा। नाम जेकर भगवन्त सिंह मान बा। दिल्ली में केजरी, बिहार में चाचा आ बंगाल में दीदी की बाद अब भगवन्त भईया ही निशाना पर हवें। एगो कहावत ह -"साड्डी न बुलाई, मैं लाढ़े दी ताई"। केहू बुलाई चाहे ना बुलाई हम हर जगह पहुंच जाईब। अबहिन बंगाल के झालमुडी आ मछरी भात के कमाल पूरा देश देखल। अब मक्का के रोटी आ सरसों के साग देखीं। भाँगड़ा नृत्य देखीं। सलवार समीज पर पगड़ी के परिधान देखीं। जेइसन देश ओइसन भेष बनाही के परेला। अबकी बाघा बार्डर तक चढ़ाई के आडर बा। सब एजेंसी लगा दिआई। लेकिन पंजाब भी लिआई।
पांच साल से राज सत्ता के सुख से वंचित सुनील जाखड़, परमिन्दर बराड़, अमरिंदर सिंह, चरनजीत सिंह, इंदर इक़बाल आ शीतल अंगुराल में जोश भरल जाई। आम आदमी वालन के तोड़ के आपन खास आदमी बनावल जाई। अबकी आम आदमी के अंतिम दीया बुता के न जाने क्या क्या किया टाइप काण्ड क दिहल जाई।
राजनीति के 'चस्का' अइसन लत ह कि चाय की चुस्की से शुरू होके मुसकी मारत कुर्सी के हवस तक पहुँच जाला। अब पंजाब की लोगन से आपन पुरान नाता बतावल जाई। जनता से रिश्ता जोड़ाई, भले बाद में रिश्ता खस्ता हो जा। वादा के बाज़ार लागी। गप्पन के बिटोर होई। आपन वाशिंग मशीन फेरु काम कईल शुरू क दी। एक से एक दागी के धो के धवल बना दिहल जाई। आ फेर कवनो भ्रष्टाचारी के पीठ ठोक के पवित्र बता दिहल जाई। कुरसी कब्जा के खेल चलत रही। असली मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी पर मौन आ सवर्ण लोग के वोट लेके पूछल जाई -आप हैं कौन?
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीँ रफ्ते-रफ्ते...
एन. डी. देहाती
एगो देहाती मनई के ब्लॉग
रविवार, 10 मई 2026
10 मई 2026 के अंक में प्रकाशित
रविवार, 3 मई 2026
3 मई 2026 की अंक में प्रकाशित
रविवार, 26 अप्रैल 2026
26 अप्रैल 2026 के अंक में प्रकाशित
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बड़ा बेहाल बा। राजनीति में थूक के चाटल श्रृंगार बनल बा। लगभग हर दल में कुछ अफलातून होलें। दुनो जून अपनी विरोधी के संसदीय गारी सुनावे वाला राजनितिक खेलाड़ी कब पलटी मार के अपने बयान से पलट जाई आ जेके काल्ह तक छछूंदर कहले रही ओही के आज सुंदर बतावे लागी, कहल मुश्किल बा । लेकिन भया जबसे सोशल मीडिया के जमाना आईल बा, पलटीमारन के तुरंते पतलून उतार के चड्डी पर लाके लोग रख देत हवें। अब जनता भी ठीक से ट्रोल करत बा। ट्रोल का पूरा नंगा खड़ा कर देत बा बाजार में। खोखन पार्टी के सात धुरंधरन का अपने ही पार्टी के देख के धोआइन ढेकार आवे लागल। सातों जने जब ओने सात चभोक्का मार के खूब बकइती करत रहलें, लेकिन सरकार के ऐके इंजेक्शन में विचार बदल गईल। भाई, सरकार कवनो होखे, ओकरे लगे तंत्र हजार बा, मंत्र हजार बा। कब केकर कहां कईसे प्रयोग होई इ समय के हिसाब से तय होला। कहां दस रुपया के झालमुड़ी से प्रभाव पड़ी, कहां मंगर के टीका चंदन लगा के भगवा गमछा शरीर पर डार के मछरी -भात के भोग लागी? इ सब समय आ स्थान की हिसाब से तय होई। बिहार में केहू मछरी खात फोटो डाल के चिढ़ाई त हम्मन खूब गरिआवल जाई लेकिन ज़ब बंगाल में हमरे लोग खाई आ मंगर भी ना बराई त हम्मन के बेहयागिरी पर के सवाल उठाई?
देश दुनिया में अइसन बहुत चेहरा देखल गईल, जवन तवायफ़न के कोठा बंद करावे निकरल रहलें, ऐके बेर कोठा पर चढ़ले की मिजाज बदल गईल। सिक्का की खनखनाहट से एतना प्रभावित भइलें कि अब कोठा के भडुआ बन के खुदे ग्राहक खोज खोज लाके मुजरा सुनावत हवें। इ सब विचार की परिवर्तन से नईखे होत। डर से होता, भय से होता, लालच से होता। राजनीति के दशा एतना खराब हो गईल बा कि अब दलबदल कानून के नाम बदल के धरपकड़ क़ानून कईला के जरूरत बा। केहू के पकड़ ल। पकड़ के ठीक से रगड़ द। अपनी वाली वाशिंग मशीन में धो द। झक्कास चमक की साथ बाजार में जयचंद जेइसन गद्दार भी राष्ट्रभक्त वफ़ादार नजर आवे लागी।
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते-रफ्ते...