एन. डी. देहाती
एगो देहाती मनई के ब्लॉग
रविवार, 31 मई 2026
31 मई 2026 की अंक में प्रकाशित
रविवार, 24 मई 2026
24 मई 2026 के अंक में प्रकाशित
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। चारों ओर कॉकरोच, चारो ओर तेलचट्टा। तिलचट्टा और तेलचट्टा में बहुत महीन अंतर बा। दोनों के इतिहास पुरातन बा। तिलचट्टा का जन्म के जनम लगभग 30 से 35 करोड़ वर्ष पूर्व मतलब डायनासोर से भी पहले भईल रहे। हम भाग्यशाली हईं कि यह जीव के पहिला उतपत्ति हमरे देश में भईल रहे। घर की कोने अंतरे, लगभग हर सरकारी आफिस में फाईल चाटत, कुरसी मेज की नीचे भागत तिलचट्टा के बहुत देखल गईल। वर्ष 2026 तिलचट्टन के ऐतिहासिक वर्ष साबित भईल। पूरा दुनिया तेलचट्टन की शोर से सराबोर बा। देश में नौतपा चलत बा, लोग लू से डरल बा लेकिन सबकर मोबाईल तेलचट्टन से भरल बा। देश में तमाम गणना होला। जनगणना, बाल गणना, पशु गणना, साक्षर-निरक्षर गणना जेकरे खातिर तमाम कर्मचारी लगावल जालें। लेकिन देश में पहिला बेर तिलचट्टा गणना हो गईल। इ गणना भाजपा जईसन बड़वर पार्टी की ऑन लाइन फॉलोअर से बढ़ गईल। जन गणना में 33 सवाल के जवाब देबे के परेला लेकिन तिलचट्टा गणना में बस एक क्लिक और हो गयी गणना।
अमूमन तिलचट्टा के उमर एक से दो वर्ष होला, लेकिन कुछ विशेष प्रजाति के तिलचट्टा पांच वर्ष तक जियेंले। देश में कुछ खलिहर लोग बा, एक जने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से पेज बनवले त चारे दिन में एक करोड़ नब्बे लाख फॉलोवर्स हो गईले। ओकरा बाद सोशल मीडिया पर खलिहर लोग तमाम पार्टी बनाके स्वयं भू जिलाध्यक्ष बने लगले। हिट जनता पार्टी, छिपकली जनता पार्टी, गिरगिट जनता पार्टी...आदि आदि पार्टी। देश में मूल मुद्दा महंगाई, तेल संकट, गैस संकट, बेरोजगारी पर बहस कईला की जगह पर तेलचट्टा खाली तिलचट्टा पर बहस करत हवें।
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीँ रफ्ते-रफ्ते...
रविवार, 17 मई 2026
17 मई 2026 की अंक में प्रकाशित
रविवार, 10 मई 2026
10 मई 2026 के अंक में प्रकाशित
अब पंजाब के बारी बा..
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। पंजाब के लेके मलाल बा। दिल्ली, बिहार, बंगाल की बाद अब पंजाब के ही बारी बा। ज़ब तक पूरा भारत पर कब्जा ना हो जाई दिल में चैन नईखे।
पंजाब में एगो प्रचलित कहावत ह -"जिद्दी कोठी ते दाने, ओहदी कमली वी सयाने"। एकर अर्थ ह -अर्थ ह की जेकरा घर में समृद्धि धन (अनाज) बा ओकर बेवकूफ बेटवा भी दुनिया के लिए समझदार (सयान) मानल जाला। त सयान नेताजी कई राज्य में दूसर दल की नेता लोग के कुरसी छीन के पंजाब के कुरसी छिनला की तैयारी करत बाड़न। कल से, छल से, बल से, चाहें कौनो कौशल से पंजाब पर मार्च 27 की बाद आपन झंडा डंडा लहरा देबे के बा। अब हमसे उ का टकराई - जेकरा "पल्ले नई धेला, करदी मेला-मेला"। "आम आदमी पार्टी" की जेब में फूटी कौड़ी नईखे, एगो पंजाब पर एतना गुमान बा। नाम जेकर भगवन्त सिंह मान बा। दिल्ली में केजरी, बिहार में चाचा आ बंगाल में दीदी की बाद अब भगवन्त भईया ही निशाना पर हवें। एगो कहावत ह -"साड्डी न बुलाई, मैं लाढ़े दी ताई"। केहू बुलाई चाहे ना बुलाई हम हर जगह पहुंच जाईब। अबहिन बंगाल के झालमुडी आ मछरी भात के कमाल पूरा देश देखल। अब मक्का के रोटी आ सरसों के साग देखीं। भाँगड़ा नृत्य देखीं। सलवार समीज पर पगड़ी के परिधान देखीं। जेइसन देश ओइसन भेष बनाही के परेला। अबकी बाघा बार्डर तक चढ़ाई के आडर बा। सब एजेंसी लगा दिआई। लेकिन पंजाब भी लिआई।
पांच साल से राज सत्ता के सुख से वंचित सुनील जाखड़, परमिन्दर बराड़, अमरिंदर सिंह, चरनजीत सिंह, इंदर इक़बाल आ शीतल अंगुराल में जोश भरल जाई। आम आदमी वालन के तोड़ के आपन खास आदमी बनावल जाई। अबकी आम आदमी के अंतिम दीया बुता के न जाने क्या क्या किया टाइप काण्ड क दिहल जाई।
राजनीति के 'चस्का' अइसन लत ह कि चाय की चुस्की से शुरू होके मुसकी मारत कुर्सी के हवस तक पहुँच जाला। अब पंजाब की लोगन से आपन पुरान नाता बतावल जाई। जनता से रिश्ता जोड़ाई, भले बाद में रिश्ता खस्ता हो जा। वादा के बाज़ार लागी। गप्पन के बिटोर होई। आपन वाशिंग मशीन फेरु काम कईल शुरू क दी। एक से एक दागी के धो के धवल बना दिहल जाई। आ फेर कवनो भ्रष्टाचारी के पीठ ठोक के पवित्र बता दिहल जाई। कुरसी कब्जा के खेल चलत रही। असली मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी पर मौन आ सवर्ण लोग के वोट लेके पूछल जाई -आप हैं कौन?
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीँ रफ्ते-रफ्ते...