रविवार, 24 मई 2026

24 मई 2026 के अंक में प्रकाशित

कहवां ना बाड़न तेलचट्टा...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। चारों ओर कॉकरोच, चारो ओर तेलचट्टा। तिलचट्टा और तेलचट्टा में बहुत महीन अंतर बा। दोनों के इतिहास पुरातन बा। तिलचट्टा का जन्म के जनम लगभग 30 से 35 करोड़ वर्ष पूर्व मतलब डायनासोर से भी पहले भईल रहे। हम भाग्यशाली हईं कि यह जीव के पहिला उतपत्ति हमरे देश में भईल रहे। घर की कोने अंतरे, लगभग हर सरकारी आफिस में फाईल चाटत, कुरसी मेज की नीचे भागत तिलचट्टा के बहुत देखल गईल। वर्ष 2026 तिलचट्टन के ऐतिहासिक वर्ष साबित भईल। पूरा दुनिया तेलचट्टन की शोर से सराबोर बा। देश में नौतपा चलत बा, लोग लू से डरल बा लेकिन सबकर मोबाईल तेलचट्टन से भरल बा। देश में तमाम गणना होला। जनगणना, बाल गणना, पशु गणना, साक्षर-निरक्षर गणना जेकरे खातिर तमाम कर्मचारी लगावल जालें। लेकिन देश में पहिला बेर तिलचट्टा गणना हो गईल। इ गणना भाजपा जईसन बड़वर पार्टी की ऑन लाइन फॉलोअर से बढ़ गईल। जन गणना में 33 सवाल के जवाब देबे के परेला लेकिन तिलचट्टा गणना में बस एक क्लिक और हो गयी गणना।
अमूमन तिलचट्टा के उमर एक से दो वर्ष होला, लेकिन कुछ विशेष प्रजाति के तिलचट्टा पांच वर्ष तक जियेंले। देश में कुछ खलिहर लोग बा, एक जने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से पेज बनवले त चारे दिन में एक करोड़ नब्बे लाख फॉलोवर्स हो गईले। ओकरा बाद सोशल मीडिया पर खलिहर लोग तमाम पार्टी बनाके स्वयं भू जिलाध्यक्ष बने लगले। हिट जनता पार्टी, छिपकली जनता पार्टी, गिरगिट जनता पार्टी...आदि आदि पार्टी। देश में मूल मुद्दा महंगाई, तेल संकट, गैस संकट, बेरोजगारी पर बहस कईला की जगह पर तेलचट्टा  खाली तिलचट्टा पर बहस करत हवें।
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रविवार, 17 मई 2026

17 मई 2026 की अंक में प्रकाशित

मीतऊ! हमहूँ देश भक्त हईं ....
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -बड़ा बवाल बा। महंगाई से मरत आम आदमी के जियल मोहाल बा। ऊपर से हाल इ बा कि कुछ बोल देईब त अंध भक्त भाई लोग झट्ट से देश द्रोही बता देई।  
अरे मीतऊ! हमहूँ देश भक्त हईं ....। जवन देखिला उहे लिखिला। 
देश में महंगी बढ़े त रउरा त्यागी बन जाईं। ना बन पाईं तबो देखाई कि हम त्याग करत हईं। जवना देश में 80 करोड़ लोग सरकार की मुफ्त की राशन पर जियत बा, ओही देश में कार आ कोठी वाला भी कोटेदार की इहा से राशन लेजाके दुकान पर बेच के नकदी बना लेत बा। देश में त्याग के नमूना भी अजबे अजबे लउकत बा। लोग इनोवा से जाता। फारचूनर से जाता। बस में, इ रिक्शा में बैठला पर फोटो खिचवावत बा,भले ओकर इनोवा और फारचूनर बस की पीछे पीछे खलिहे आवत बा रहे। लेकिन त्याग देखावल जाता। ईधन बचावत बा। 
देश में भाषण बा - वन नेशन। सिस्टम दू तरह के बा। 
आम आदमी से सोना खरीदला के मनाही कईल जाता। अब भला बताईं येह महंगी में सोना खरीदे के औकाते केकरा लगे बचल बा? तनी उनकी बारे में बोलीं-जे विदेश में जाके 200 करोड़ के हीरा जड़ाईल ब्लाउज के प्रदर्शन करत हई। पश्चिम बंगाल में जवना नेताजी की घरे सोने के गहना ही ना, पलंग बा सोने के, सोने खातिर। सोना देखे के बा त राजनेता, फ़िल्म अभिनेता, उद्योगपति की इहा देखीं। आम मनई त एगो मंगलसूत्र आ मेहरी के कान के बाली खातिर रोज घर से गाली सुनत बा।
देश के अर्थ व्यवस्था मजबूत करे के बा त जेईसे आम आदमी के मोबाईल मात्र तीन सौ में 28 दिन वाला महीना लगातार चलत बा वइसेही नेता आ मंत्री के चले के चाहीं। एम पी साहब के काहें साढ़े 12 हजार महीना मोबाईल खर्चा खातिर दिहल जाता? विधायक जी के 9 हजार रुपया काहें दिआता? तनी इहो सब त्याग देखा देऊ। तीन सौ में ही मोबाईल चला लेऊ। हंसी त तब आवत बा ज़ब दूसरा के बचत के ज्ञान देबे वाला महामानव जी खुदे लाखों के शूट दिन में ही तीन बेर बदलत हवें। कवने ना शास्त्री जी दुइगो धोती पर साल गुजार देत रहलें। कबो इहो सोचल कईल जा।
आपन हाल का बताईं। अंध भक्त बनला की चक़्कर में वाहन छोड़ के चार दिन पैदल का चल दिहलीं, लू लाग गईल, अब तबियत खराब बा। चार सौ के तेल बचवली तवन चार सौ डॉक्टर ले गईल। आ रहल बात विरोधिन के , त प्रधान सेवक जी वाहन के कम प्रयोग के बात कईलन त हमरी इहाँ के एगो सेवक जी जवन पहिले ऐके गाड़ी से घूमत रहलें उ अब पांच गो वाहन से चलत हवें। 
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रविवार, 10 मई 2026

10 मई 2026 के अंक में प्रकाशित

अब पंजाब के बारी बा..
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। पंजाब के लेके मलाल बा। दिल्ली, बिहार, बंगाल की बाद अब पंजाब के ही बारी बा। ज़ब तक पूरा भारत पर कब्जा ना हो जाई दिल में चैन नईखे।
पंजाब में एगो प्रचलित कहावत ह -"जिद्दी कोठी ते दाने, ओहदी कमली वी सयाने"। एकर अर्थ ह -अर्थ ह की जेकरा घर में समृद्धि  धन (अनाज) बा ओकर बेवकूफ बेटवा भी दुनिया के लिए समझदार (सयान) मानल जाला। त सयान नेताजी कई राज्य में दूसर दल की नेता लोग के कुरसी छीन के पंजाब के कुरसी छिनला की तैयारी करत बाड़न। कल से, छल से, बल से, चाहें कौनो कौशल से पंजाब पर मार्च 27 की बाद आपन झंडा डंडा लहरा देबे के बा। अब हमसे उ का टकराई - जेकरा "पल्ले नई धेला, करदी मेला-मेला"। "आम आदमी पार्टी" की जेब में फूटी कौड़ी नईखे, एगो पंजाब पर एतना गुमान बा। नाम जेकर भगवन्त सिंह मान बा। दिल्ली में केजरी, बिहार में चाचा आ बंगाल में दीदी की बाद अब भगवन्त भईया ही निशाना पर हवें। एगो कहावत ह -"साड्डी न बुलाई, मैं लाढ़े दी ताई"। केहू बुलाई चाहे ना बुलाई हम हर जगह पहुंच जाईब। अबहिन बंगाल के झालमुडी आ मछरी भात के कमाल पूरा देश देखल। अब मक्का के रोटी आ सरसों के साग देखीं। भाँगड़ा नृत्य देखीं। सलवार समीज पर पगड़ी के परिधान देखीं। जेइसन देश ओइसन भेष बनाही के परेला। अबकी बाघा बार्डर तक चढ़ाई के आडर बा। सब एजेंसी लगा दिआई। लेकिन पंजाब भी लिआई।
पांच साल से राज सत्ता के सुख से वंचित सुनील जाखड़, परमिन्दर बराड़, अमरिंदर सिंह, चरनजीत सिंह, इंदर इक़बाल आ शीतल अंगुराल में जोश भरल जाई। आम आदमी वालन के तोड़ के आपन खास आदमी बनावल जाई। अबकी आम आदमी के अंतिम दीया बुता के न जाने क्या क्या किया टाइप काण्ड क दिहल जाई।
राजनीति के 'चस्का' अइसन लत ह कि चाय की चुस्की से शुरू होके मुसकी मारत कुर्सी के हवस तक पहुँच जाला। अब पंजाब की लोगन से आपन पुरान नाता बतावल जाई। जनता से रिश्ता जोड़ाई, भले बाद में रिश्ता खस्ता हो जा। वादा के बाज़ार लागी। गप्पन के बिटोर होई। आपन वाशिंग मशीन फेरु काम कईल शुरू क दी। एक से एक दागी के धो के धवल बना दिहल जाई। आ फेर कवनो भ्रष्टाचारी के पीठ ठोक के पवित्र बता दिहल जाई। कुरसी कब्जा के खेल चलत रही। असली मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी पर मौन आ सवर्ण लोग के वोट लेके पूछल जाई -आप हैं कौन?
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रविवार, 3 मई 2026

3 मई 2026 की अंक में प्रकाशित

मुर्गी मरो चाहे मनई, डीजे बाजी त बाजी 
मनबोध मास्टर पूछलें बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें - हाल त बड़ा बेहाल बा। अइसन डेंजर बाजा के प्रचलन बढ़ल की मुर्गी होखे चाहें मनई, यह बाजा से मर जालें लेकिन सरकार यह पर रोक आज तक ना लगवलसि। अखिलेश भईया के सरकार रहे चाहें योगी बाबा के। इ बाजा बाजी त बाजी। कान फाडू संगीत से दहलत करेजा काम कईल बंद क दे त बंद क दे लेकिन बाजा ना बंद होई। सुने में आईल येही डेंजर बाजा जवना के डीजे कहल जाता ओकर आवाज़ 140 मुर्गी ना बर्दाश्त क पवली। संगीत की ऐके धुन में सदा के लिए सुत गईलीं। मुर्गी रहली त मरलो पर उनकर मांस कामे आ गईल। कुछ बरात में कुछ होटल में कमे दाम में खपत हो गईल। आदमी के मांस त कवनो कामे भी ना आई। मुर्गा समाज ही ना मनई समाज के लिए भी इ दिन याद रखल जाई। कमजोर करेजा पर धक्क धक्क लागे वाला इ डीजे बहुत लोकप्रिय भी ह। अब त एकरा आभाव में दुर्गा जी, सरस्वती जी, गणेश जी के विदाई भी सुन लागत बा। तिलक, बरात, परछावन ही ना मटकोड़वा में भी डी जे बाजत बा। लोग के करेजा पर हाथोंड़ी जैसे चोट करे चाहें घन जईसे, जिम्मेदारन की कान में आवाज़ ना जाई। बड़की अदालत भी तेज बजावला पर रोक लगवले बा। लेकिन वाह रे सरकार! ओकरा त डीजे के अवजिये ना सुनाई देत बा, हाँ महजिदे के लाउडस्पीकर से तेज आवाज़ वाला डीजे काहें नईखे सरकार का सुनात? मुर्गा मुर्गी का त मरहि के बा चाहे बाजा से मरें चाहे बिरियानी बन के मरें, लेकिन मनई पर त दया दिखाई। बुढ़ बीमार मनई के डीजे से करेजा हिला के जनि मारी। अइसन घटिया आ कलंकित बाजा पर पूरा रोक लगाई। फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते रफ्ते...

रविवार, 26 अप्रैल 2026

26 अप्रैल 2026 के अंक में प्रकाशित

काहो अफलातून! उतर गईल न पतलून...

मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बड़ा बेहाल बा। राजनीति में थूक के चाटल श्रृंगार बनल बा। लगभग हर दल में कुछ अफलातून होलें। दुनो जून अपनी विरोधी के संसदीय गारी सुनावे वाला राजनितिक खेलाड़ी कब पलटी मार के अपने बयान से पलट जाई आ जेके काल्ह तक छछूंदर कहले रही ओही के आज सुंदर बतावे लागी, कहल मुश्किल बा । लेकिन भया जबसे सोशल मीडिया के जमाना आईल बा, पलटीमारन के तुरंते पतलून उतार के चड्डी पर लाके लोग रख देत हवें। अब जनता भी ठीक से ट्रोल करत बा। ट्रोल का पूरा नंगा खड़ा कर देत बा बाजार में। खोखन पार्टी के सात धुरंधरन का अपने ही पार्टी के देख के धोआइन ढेकार आवे लागल। सातों जने जब ओने सात चभोक्का मार के खूब बकइती करत रहलें, लेकिन सरकार के ऐके इंजेक्शन में विचार बदल गईल। भाई, सरकार कवनो होखे, ओकरे लगे तंत्र हजार बा, मंत्र हजार बा। कब केकर कहां कईसे प्रयोग होई इ समय के हिसाब से तय होला। कहां दस रुपया के झालमुड़ी से प्रभाव पड़ी, कहां मंगर के टीका चंदन लगा के भगवा गमछा शरीर पर डार के मछरी -भात के भोग लागी? इ सब समय आ स्थान की हिसाब से तय होई। बिहार में केहू मछरी खात फोटो डाल के चिढ़ाई त हम्मन खूब गरिआवल जाई लेकिन ज़ब बंगाल में हमरे लोग खाई आ मंगर भी ना बराई त हम्मन के बेहयागिरी पर के सवाल उठाई?
देश दुनिया में अइसन बहुत चेहरा देखल गईल, जवन तवायफ़न के कोठा बंद करावे निकरल रहलें, ऐके बेर कोठा पर चढ़ले की मिजाज बदल गईल। सिक्का की खनखनाहट से एतना प्रभावित भइलें कि अब कोठा के  भडुआ बन के खुदे ग्राहक खोज खोज लाके मुजरा सुनावत हवें। इ सब विचार की परिवर्तन से नईखे होत। डर से होता, भय से होता, लालच से होता। राजनीति के दशा एतना खराब हो गईल बा कि अब दलबदल कानून के नाम बदल के धरपकड़ क़ानून कईला के जरूरत बा। केहू के पकड़ ल। पकड़ के ठीक से रगड़ द। अपनी वाली वाशिंग मशीन में धो द। झक्कास चमक की साथ बाजार में जयचंद जेइसन गद्दार भी राष्ट्रभक्त वफ़ादार नजर आवे लागी।
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रविवार, 12 अप्रैल 2026

12 अप्रैल 2026 की अंक में प्रकाशित

लाख रुपया पगार बा, त हजार गो काम बा 
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बड़ा बेहाल बा। कहीं स्कूल में सुखार बा, कहीं स्कूल में बहार बा। गार्जियन लाचार बा। जेकरा दु चार ठे छोट बच्चा होवे ओकर बंटा ढार बा। सरकारी स्कूल में सब फ्री बा, कॉपी -किताब, कपड़ा लत्ता, भोजन पताई लेकिन एगो चीज नईखे, जवना के नाम ह पढाई। अगर साचो सरकारी स्कूल में पढ़ाई रहित त ओही सरकारी स्कूल के मास्स साहब अपनी बेटवा के प्राइवेटवा में दाखिला ना करइतन। लोग कहता कि सरकारी स्कूल की मास्टर से लाख रुपया पगार बा। अरे भाई इहो त देखीं उनकी लगे हजार को सरकारी काम बा। जब सरकार चाहें जहां नाध दे। प्राइवेट के हाल उ बा जेईसे बड़े बड़े माॉल। एक ही छत के नीचे कई प्रकार के ब्यापार। अपनी बच्चा के दाखिला कराई, सीधे कल्लटर बना के छोड़िहे। बारहों महीना एडमिशन ओपेन बा। नाम लिखवाई। कई हजार के कॉपी किताब ले जाई। कई हजार के ड्रेस ले जाईं। जूता मोजा, टाई सब ओहिजा बिकाई। गनीमत बा अबे रेस्टोरेंट नईखे खुलल ना त बबुआ के टिफिन भी घर से ना जाइत। घर से बस आई जाई। लईका ले आईं सीधे कल्लटर बनायीं। हाइस्कूल फेल स्कूल की निदेशक की येह मॉल पर पांच हजार पगार के नौकर रउरी लेडिकन के एकदम पढा लिखा के टंच क दिहे। कुछ कमी बेसी होई त घरही ट्यूशन लगवा दीं। 
सरकार लगातार शिक्षा में सुधार के झाल बजावत बा। मुफ्त शिक्षा के व्यवस्था बा। सरकारी स्कूल में योग्य शिक्षक बाड़न। लाख रुपया से ऊपर पगार बा, लेकिन पढ़ाई अइसन की गाँव गाँव में खुलल सरकारी स्कूल में उहे लड़िका पढ़े जात हवें जेकर माई -बाबू गरीब बाड़न। बाकी ज्यादातर सामान्य परिवार के लड़िका त प्राइवेट में ही पढ़ता। सरकार के येह प्राइवेट स्कूल पर कवनो नियंत्रण नईखे। अधिकारी से लेके नेता तक सबकी जेब में कुछ न कुछ लाभान्स जाता। अख़बार के भी पेट भरता, खूब विज्ञापन छपत बा। सालोसाल त मॉल से माल मिलते बा। पंद्रह अगस्त आ छब्बीस जनवरी के विशेष रूप से पत्रकार लोग भी बहत गंगा में हाथ धोवत हवें।
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रविवार, 5 अप्रैल 2026

5 अप्रैल 2026 में प्रकाशित भोजपुरी व्यंग्य

जिल्लत झेलत हवें, फिर भी बोलत हवें 


मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा का हाल बा? बाबा बोललें भ्रमित लोग का गैस के किल्लत बा। देश में गैस के कवनो कमी नईखे। नजर के दोष बा। सबकी पेट में गैस बा। शहर के नाला में गैस बा। होटल रेस्टोरेंट में गैस बा। सरकार की प्रवचन में गैस बा। प्रशासन की वचन में गैस बा। एकरा बाद भी किचेन में चूल्हा बंद बा। हमरा जइसन अंधभक्तन के प्यारा प्रधानमंत्री गैस की किल्लत पर एक शब्द भी ना बोलिहे। उ बंगाल पर बोलिहे जहां उनकर अगिला जन्म होखे वाला बा। उ आसाम पर बोलिहे काहें कि बागान आ चाय से उनकर बचपन से नाता बा। उनकर चेला चपाटी बोलिहन कि दूषित हवा फैला के देश के माहौल खराब कइला में जे लागल बा उ देश द्रोही बा। असल राष्ट्र भक्त गैस फैस के चक़्कर में ना रहेला। 
ईरान -अमेरिका में मार होता त ओहसे हमारा कवन फरक बा?  लेकिन हमरे जिला जवार में चकरा, भागलपुर, भटनी, सोहनपुर, सलेमपुर में जवन मारामारी बा ओकर त बात उठबे करी। घर घर मारा मारी बा। साच हाल इ बा कि मरनी जियनी, काम क्रिया ब्रह्मभोज में भी गैस नईखे मिलत। जवना नेता लोग की मुंह से गैस के बरखा होता जेकरा दिक्क़त होखे ओकरा मुंह में सिलेंडर लगा के गैस के भर के आपन काम चलावल जा।
एतना सुनते पड़ोसी बाबा भड़क गईलें। बोललें कि विरोधी की बहकावा में मत आवs बच्चा। राष्ट्र की साथे रहा। बंगाल - आसाम के चुनाव बीत जायेदा, अबे और खेल आ झमेल सामने आई। 
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रविवार, 29 मार्च 2026

29 मार्च 2026 की अंक में प्रकाशित

मंत्री - नेता, रोये-धोये, अफसर पर नहीं लगाम...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। मलाल येह बात के बा की - "मंत्री - नेता, रोये-धोये, अफसर पर नहीं लगाम...। जनता बैठे माथा पीटे, सूझे न एको काम।।" यूपी में बड़ा कानाफुसी बा। साझे की सरकार में मंत्री भी लाचार हवें। जवना मंत्री का जनता की दुख दर्द पर भी दिल ना पसीजेला उहो मंत्री पुक्का फाड़ फाड़ रोवत हवें। मंत्री जी के आंसू गिल्सरिन लगा के ना निकरत रहे। उ घड़िआली आंसू भी ना रहे। उ बिरादरी के कष्ट देख के करेजा से निकलल हुक रहे। मंत्री जी की रोवला से बिरादरी ओतना दुखित ना भइल जेतना एम पी साहब, मंत्री की आंसू पर ठट्ठा मारत रहलेन। अब एम पी साहब के भी महादेव ही रक्षा करिहै। एम पी साहब का शायद पता ना होखे, उनकी क्षेत्र में जेतना बाभन-ठाकुर-बनिया ना बाड़न ओतना त मंत्री जी के बिरादरी वाला लोग बा। बिरादरी के लोग अपना मंत्री जी के भगवान अइसन मानेला। कबो पैर दबावेला, कबो आरती उतारेला। एमपी साहब, खिल्ली उड़ावत हवा त उड़ा ल, अबकी मंत्री के बिरादरी तोहार नाव डूबा के मानी। दिल्ली के राह छोड़ के फेरु मुंबई न जाएके पर जा। हरहर महादेव, बिरादरी में गुस्सा बहुत बा। अबकी बाबा भी ना बचा पईहें। मुंहे के जब्बर हो गईल बाड़s त अबकी फरिया जाई। मंत्री जी, इहो कहलेन कि कवनो अफसर हमार बतिये नईखे सुनत। अब मंत्री जी के कईसे समझावल जा कि भईया अपनी इहाँ खाली बाबा के चलेला।
एक जने दूसर मंत्री जी हवें। पुलिस विभाग के नौकरी छोड़ के सियासत के चस्का लागल त पार्टी ज्वाइन क लिहले। अगर विभाग में रहितन त येह समय सबसे बड़का पद पर रहितन। एडीजी, आई जी, डीआईजी सलाम ठोकतन। उनकी ईमानदार छवि के बहुत चर्चा रहल। राजनीति में भी समाज के कल्याण ईमानदारी से करे लन। एगो कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचल रहलें। हर मंत्री के प्रोटोकाल होला, लेकिन देखल गईल कि कार्यक्रम में डीएम के का कहल जा एगो कवनो एसडीएम भी ना पहुंचले। ईमानदार आ स्वछ छवि वाला मंत्री जी के स्वाभिमान जागल, कार्यक्रम छोड़ के चल दिहले। ठीके कहल गईल बा - आवत ही हरसे नहीं, नैनन नहीं स्नेह। तुलसी वहाँ ना जाईये, कंचन बरसत मेह। 
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रविवार, 1 मार्च 2026

1 मार्च 2026 क़ी अंक में प्रकाशित


इनकर लहंगा उठी अब रिमोट से...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। होली आईल बा। मन फगुआईल बा। बाबा लोग भी बब्बर हो गईल बा। मुंहे के जब्बर हो गईल बाड़न। भंग के रंग अइसन चढ़ल बा  कि एगो भगवा दूसरका भगवा के भगही खोल के नंगा कईला में लागल बा। चारों ओर से सनातन पर हमला बा। इ हमला कवनो चेकदार हरियर लुंगी वाला ना, नारंगी लुंगी वाला ही  कईले बाड़न । जेतना धर्म के ठेकेदार लोग बा, मुंह में दही जमा के मौनी बाबा बनल बा लोग। ठट्ठा उड़त बा। लुग्गा लुटाता। इज्जत बांस की पुलईं टंगा गईल बा। केकर- केकर नाम लेई, जईसन उदई ओइसन भान...।
  विश्व में रंग के ना बारूद के होली होता। अमेरिका आ इजराईल दुनो ईरान पर हमला सत्तर जने के होलिका जला दिहलेँ। पिचकारी के बात छोड़ी मिसाईल के बात बतिआईं। मौत के मातम की बीचे आंध्र प्रदेश में पटाखा फैक्ट्री में अस पटाखा दगल की 21 जने मर गईलेन। सब मजूर रहलें। रोटी खातिर मजबूर रहलेन। केहू हजूर थोड़े मरल बा की नेता लोग का कवनो दुख होई। 
देश में यूजीसी पर बोलला में सवर्ण नेता लोग का लाज लागत बा। कुछ बाबा लोग बोलत बा। जेईसे लखनऊ में शनीचर की दिने ब्राह्मण महासभा की बैठक में मिसिर,  पाठक,  अग्निहोत्री,  पांडेय  त पक्ष -विपक्ष में बेसी बेसी बोल दिहल लोग लेकिन जब  शर्माजी बोले खड़ा भइलें त अस लिहो लिहो भईल की लगल होली आ गईल। बाभन देवता लोग त पहिलहि से शंकराचार्य बाबा की विवाद पर भितरे भीतर डहुरत बा लोग ऊपर से आयोजन के मुखिया त्रिपाठी प्रबुद्ध समागम की नाम पर  लोग के जुटान करा के सवाल खड़ा क दिहलेँ कि शंकराचार्य की अपमान पर सरकार संज्ञान काहे नईखे लेत?  पाठक दावा करते रहि गईलेन कि सरकार ब्राह्मण समाज क़ी साथे बा, लेकिन बाबा लोग के अखियाँ लाले लाल, अखिया लाले लाल...। भईल बवाल। नारेबाजी से लगल कई जने नेता लोग क़ी पैजामा के नाड़ा ढील हो जाई। अब त सब गावत बा -इनकर लहंगा उठा देईब रिमोट से..।
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रविवार, 25 जनवरी 2026

25 जनवरी 2026 की अंक में प्रकाशित भोजपुरी व्यंग्य

"बाबागर्दी"की गुमान में मचल बा गर्दा गर्दा 
मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें-हाल त बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। तीरथराज प्रयाग में राजनीति के चकरगति भईल बा। हिन्दू एकता के बात करत- करत हिन्दू लोग ही दु फाड़ हो गईल। कुछ शंकराचार्य के समर्थन त कुछ सरकार के समर्थक। सनातन के अइसन उपहास सनातनी राज में ही देखे के मिलला पर बड़ा कष्ट होता। मौनी अमवस्या से लेके सात दिन में भगवा भिड़ंत की आपसी दम्भ और अहंकार में आस्था के अस्थि विसर्जन पर लागल संत समाज हिन्दू समाज के केतना भला करता? रउरा खुद देखीं। सनातन के नारा रहे - धर्म की जय हो। कवना धर्म के जय कईल जा? जवना धर्म में नियम कानून की मर्यादा के तोड़ल जाता । दूसरका नारा ह - अधर्म का नाश हो। सनातनी सरकार बा आ ब्रह्मचारी बालकन के चोटी उखाड़ के, लँगोटी खोल के पीटे वाला अधर्मी पर कार्रवाई नईखे होत त अधर्म के नाश कईसे होई?  तीसरा नारा ह -प्राणियों में सदभावना हो। जब साधु ही साधु से लड़त बाड़न, एक दूसरा के नीचा दिखावला में लागल बाड़न त सद्भावना कहां रह गईल? विश्व के कल्याण के बात का होई ज़ब हिन्दू समाज में ही विघटन करे वाला कईगो कालनेमि दुनो ओर भेष बदल के छल खातिर आपन -आपन जाल बिछवले बाड़न। <br>माघ महोत्सव के पुण्य क्षेत्र में भगत प्राणी शांति खोजत बा। साधु संत लोग भी सादगी त्याग, सेलिब्रेटी सुख लुटता। मंचन से वैराग्य के प्रवचन करे वाला बाबा लोग अपने त राग से विरत ना होत हवें आ भोली भाली जनता के राग द्वेष से मुक्ति के प्रवचन देत हवन। साधु की अनुचित क्रोध से अनर्थ होता। अहंकार एतना प्रबल बा कि जीवन में पछतावा से अधिका कुछ हासिल ना होई। धर्मरक्षा की लड़ाई में उहो दौड़ल आके पीठ सुघरावता जवन अपनी समय में लाठी से पीठ लाल करा देले रहे। सच्चा इंसान के हृदय में क्षोभ बा। भगत धर्मसंकट पड़ल बा। कवना ओर से खड़ा होखल जा ज़ब दुनो ओर हमरे अराध्य हवन। एक तरफ क्रोधातुर वाणी त दूसरा तरफ क्रोधातुर व्यवहार बा। दुनो ओर हठ बा। जब केहू झुके के तैयार ही ना बा त भगत के दिल दुख के दरिया बहबे करी। प्रयागराज की घटना के सच्चा भगत ना अनुमोदन करत हवें ना प्रतिकार। रात में दुख दूना तब हो गईल जब कुछ नवहा बुलडोजर बाबा जिन्दावाद के नारा लगावत संत जी की शिविर पर चढ़ गईलेन। सीसीटीवी लागल बा, वीडियो वायरल बा। लेकिन वाह रे मेला प्रशासन! कहीं कानून तोड़ला पर टूट पड़लें आ कहीं अराजकता पर छूट करेलें। 
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रविवार, 11 जनवरी 2026

11 जनवरी 2026 के अंक में प्रकाशित

गाँव- गाँव दारू बिक रहल बा, दूध बटल अपराध 

मनबोध मास्टर पूछलें - बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें-हाल त बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। माघ मकरगति भईल बा। राजनीति चकरगति भईल बा। गाँव- गाँव दारू के ठेका खुल गईल। बेचेवाला मालमाल आ पिये वाला कंगाल हो गईले। बिहार में दारू बंद भईल त यूपी वालन के रोजगार खुल गइल। जवना की लगे टूटही साईकिल ना रहे आज फरचूनर से घुमत बा। ओकरा कोठी कटरा करेंसी के बहार हो गईल, जबसे ओकरा शराब के कारोबार हो गईल। ओकर एक टांग यूपी में त दूसरका बिहार हो गईल। अब येह ठंडी में भी एक खेप बिहार पार कराके आराम से रजाई तान के सुतल बा। चारों तरफ ओकर बाजा बाजि गईल, उ राजा  हो गईल। साँच कहल बा - रजाई वाला राजा, कंबल वाला सोये। दोहरी वाला किकुरी मारे, चदरा वाला रोये। सरकार के कानून व्यवस्था में रोजे सेन्हि लगाके दनादन दारू हेलववला के कारोबार बिहार से सटल जिलन में खूब फलत-फूलत बा। नवहा बेरोजगारन के रोजगार मिल गईल बा। आबकारी विभाग के इनकम बढ़त बा, एही से कठोर कार्रवाई की जगह लचिला रुख अख्तियार कईल जाता। सीमा के थानेदारन के कमाई भी बढ़ल बा। कार्रवाई की नाम पर कबो कबो ज़ब सेटिंग नइखे हो पावत त चाप दिहल जाता। जब सेटिंग हो जाता तब आवs जा घर अपने हs। सरकार के जांच एजेंसी विरोधी दल की नेतन के घर खोनला में लागल बा। बेरोजगार लोग के आय के जांच करा दीं आँख के पट्टी खुल जाई। ज़ब कवनो काम धंधा नोकरी चकरी हइये नईखे त कहां से चरपहिया चलत बा। एकर जाँच ना होई। काहें की एकर जाँच होई त नेतन की आगे पीछे जिन्दावाद जिन्दावाद के करी? नेतन के राजनीति की चश्मा से ओहिजा बवाल दिखी जहां चुनाव होखे वाला होई । अब पश्चिम बंगाल में चुनाव बा त बंगलादेश के अत्याचार से अख़बार भरल मिलत बा । अब अख़बारवालन का भी चीन, पाकिस्तान श्रीलंका ना लउकी। अब टीवी की स्क्रीन पर छउक -छउक के बंगला देश देखावल जाई। 
राजनीति के भी आपन नजरिया होला। कहां ताके के बा, कहां झाँके के बा, आ कहां आँख बंद क लेबे के बा  ओकर अलग अलग चश्मा बा। प्रयागराज में माघ मेला लागल बा। कल्पवास करे वाला लोग त पुन्य कमाते बा एक जने दूधिया भाई सोचलेन मुफ्त के दूध दान क के कुछ पुन्य हमहूँ बिटोर लीं। बाकी त सालो साल गंगा माई की कृपा से दूध के धंधा चलते रही। माघ मेला में मुफ्त के दूध बांटे गईलेन त पुलिस पीछे पड़ गईल। पकड़ के झूसी थाने ले गईल। मुफ्त के दूध बांटे वाला भूसी ना दिहलेँ, काहे की कवनो चोर डाकू त रहलें ना उ नेता रहलें नेता। सांझ ले छूट गईलन। सवाल इ बा कि ओही मेला में किलो के किलो गांजा फूंकाता उ नाहीं मेला पुलिस के देखाता। 
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रविवार, 4 जनवरी 2026

4 जनवरी 2026 की स्वाभिमान जागरण के अंक में प्रकाशित

ई -दई घाम करs, सुगवा सलाम करs...

मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। धुंध छवले बा, कुहेसा पड़त बा। शीतलहर चलता। लइकाई में गावत रहलीं जा - "दई -दई घाम करs, सुगवा सलाम करs...तोहरी बलकवा के जड़वत बा। पुअरा फूंकी फूंकी तापत बा।"आजकल पुअरा त खेतवे में धान कटते फूंका जाता। पूस-माघ के महीना में लवना, लेहना, तेवना तीनों के अकाल चलत रहे। अब समय बदल गईल। कबो जमाना रहल, हम्मन के पुरखा पुरनिया गुलाम रहल। आजादी की लड़ाई में अपनी नगर के बहुत योगदान रहल। खजड़ी वाला भागवत भगत ज़ब गावत रहलें -गेहूआ के रोटिया रहरिया के दलिया तनी घियुवा मिलिहे ना, जब अइहे अजदिया तानि घियुवो मिलिहे ना। देश आजाद भईल त लोग एतना आजाद भईल की सड़क आ रेल लाइन की किनारे कवनो सरकारी जमीन पर मंदिर, मस्जिद, मजार बना के आपन आपन   समराज्य फैलावल शुरू कईलेन। अपना नगर में भी अइसही एगो जमीन पर मरला की बाद एक जने दफना दिहल गईले। उ भले जमीन में दफ़न रहलें उनकर साम्राज्य बढ़त गईल। सत्तर बरिस में क़ब्र पर आस्था के मेला आ मनौती की बहार में कब्र मजार बन गईल। मजार पर मन्नत की मंगन में हिन्दू मुसलमान सब बटोरात रहलेन। मजार की जमीन के विवाद में नगीना पहलवान मरा गईलन। समय बदलल। सियासी माहौल बदलल। अब गाड़ल मुर्दा उखाड़ शुरू भईल। जड़ खोजाईल त जमीन सरकारी निकलल। मजार पर लागे वाला मेला पर प्रतिबंध लाग गईल। येह साल कवनो दउरी दोकान प्रशासन ना लागे दिहलसि। जवना जगह पर मेला के रेला लागत रहे ओहिजा खाली पुलिस के झमेला देखल गईल। कागज़ पत्तर में मजार से बंजर दर्ज हो गईल। 
नेताजी जंग छेड़ देले बाड़न। जमीन बंजर बा त मजार पर बुलडोजर चलावे के मांग करत बाड़न। भीषण ठण्ड में माहौल गरम बा। ना जने कहिया दइब उगिहे। उजियार होई। लेकिन अबे मौसम में ही ना प्रशासनिक अमला में भी धुंध छवले बा। ठंड घेरले बा। लोग किकुरल बा। अब पता न इ दईब के एजेंडा ह की राजनीति के प्रोपोगंडा ह, लेकिन कुछ त ह। 
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