रविवार, 26 अप्रैल 2026

26 अप्रैल 2026 के अंक में प्रकाशित

काहो अफलातून! उतर गईल न पतलून...

मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बड़ा बेहाल बा। राजनीति में थूक के चाटल श्रृंगार बनल बा। लगभग हर दल में कुछ अफलातून होलें। दुनो जून अपनी विरोधी के संसदीय गारी सुनावे वाला राजनितिक खेलाड़ी कब पलटी मार के अपने बयान से पलट जाई आ जेके काल्ह तक छछूंदर कहले रही ओही के आज सुंदर बतावे लागी, कहल मुश्किल बा । लेकिन भया जबसे सोशल मीडिया के जमाना आईल बा, पलटीमारन के तुरंते पतलून उतार के चड्डी पर लाके लोग रख देत हवें। अब जनता भी ठीक से ट्रोल करत बा। ट्रोल का पूरा नंगा खड़ा कर देत बा बाजार में। खोखन पार्टी के सात धुरंधरन का अपने ही पार्टी के देख के धोआइन ढेकार आवे लागल। सातों जने जब ओने सात चभोक्का मार के खूब बकइती करत रहलें, लेकिन सरकार के ऐके इंजेक्शन में विचार बदल गईल। भाई, सरकार कवनो होखे, ओकरे लगे तंत्र हजार बा, मंत्र हजार बा। कब केकर कहां कईसे प्रयोग होई इ समय के हिसाब से तय होला। कहां दस रुपया के झालमुड़ी से प्रभाव पड़ी, कहां मंगर के टीका चंदन लगा के भगवा गमछा शरीर पर डार के मछरी -भात के भोग लागी? इ सब समय आ स्थान की हिसाब से तय होई। बिहार में केहू मछरी खात फोटो डाल के चिढ़ाई त हम्मन खूब गरिआवल जाई लेकिन ज़ब बंगाल में हमरे लोग खाई आ मंगर भी ना बराई त हम्मन के बेहयागिरी पर के सवाल उठाई?
देश दुनिया में अइसन बहुत चेहरा देखल गईल, जवन तवायफ़न के कोठा बंद करावे निकरल रहलें, ऐके बेर कोठा पर चढ़ले की मिजाज बदल गईल। सिक्का की खनखनाहट से एतना प्रभावित भइलें कि अब कोठा के  भडुआ बन के खुदे ग्राहक खोज खोज लाके मुजरा सुनावत हवें। इ सब विचार की परिवर्तन से नईखे होत। डर से होता, भय से होता, लालच से होता। राजनीति के दशा एतना खराब हो गईल बा कि अब दलबदल कानून के नाम बदल के धरपकड़ क़ानून कईला के जरूरत बा। केहू के पकड़ ल। पकड़ के ठीक से रगड़ द। अपनी वाली वाशिंग मशीन में धो द। झक्कास चमक की साथ बाजार में जयचंद जेइसन गद्दार भी राष्ट्रभक्त वफ़ादार नजर आवे लागी।
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते-रफ्ते...


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