रविवार, 28 जून 2026

स्वाभिमान जागरण के 28 जून 2026 के अंक में प्रकाशित

कहँतरी के दही, बिलार रखवार 
मनबोध मास्टर पूछलें बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल त बड़ा बेहाल बा। देश लुटात बा। पहिले अंग्रेज लुटलें अब सफेदपोश, खाकी, खादी सब लुटहि पर लागल बा। हाल उहे बा - कहतरी के दही, बिलार रखवार। अयोध्या में जे भइल, ऊ सुनके बड़ा कष्ट भईल। इ लुटेरा कवनो सऊदी अरब, ईरान, इराक, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, अफगानिस्तान, तुर्की, मिस्र मोरक्को, सोमालिया, ट्यूनीशिया अल्जीरिया के ना हवें। सब हिंदुस्तानी हवें। एक त चोरी, ऊपर से सीनाजोरी। पहिले कहलें कवनो चोरी ना भईल बा? फिर काहें आठ जने धरा के सरकारी घरे भेजा गईलें? लुटेरा एतना घाघ बाटेन कि डकारला की बाद जल्दी हंकारत ले ना रहलें। बहुत थुक्का फ़जीहत की बाद बड़का बड़का बिलार भी कहतरी के रखवारी से इस्तीफा दिहलें। देश में हमेशा छोटके लोग धराला, बड़का के बचा लिहल जाला। तकलीफ येह बात के बा कि जेतना लोग येह लूट में सम्मलित बा उ सब हमहूँ चौकीदार कहे वाला लोग रहे। कुछ लोग येह के चढ़ावा में चोरी कहत बा। अरे भईया कइसन चोरी? ई लूट ह लूट। येह लूट के छूट के दिहले रहे ओहू पर कार्रवाई होखे के चाहीं। जितने लोग कहतरी के दही की रखवारी में लागल रहलें सब राष्ट्रद्रोही बाड़न। कार्यों की कहतरी के दही राष्ट्र के गौरव ह। पांच सौ वरीस के लमहर संघर्ष आ हजारन लोग के प्राण न्योछावर कईला के बाद इ दही के प्रतिष्ठा भइल। रखवारी में लागल बिलारन के हैसियत साल भर में सौगुना कईसे बढ़ गईल? अगर पांच साल में कवनो आदमी सौ गुना विकास करत बा त समझ जाईं उ नेक नियति के कमाई ना ह लूट के कमाई ह। सुननी कि संत कबीर नगर में एगो दीवान जी मालखाना में रखल सोनवे साफ कर देले हवें। अरे भईया, थाना होखे चाहे मालखाना, मालिक त दीवाने-मुंशी होलें। ईमानदार उहे बा, जेके लुटे के अवसर नईखे मिलल। कवनो पद मिली त जे जवना भी हद में रही कुछ न कुछ लीला करबे करी। अब कहतरी के दही के असली साढ़ी पर हक त बिलार के ही रही, काहें की उहे रखवार बा। फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते रफ्ते....

रविवार, 21 जून 2026

21 जून 2026 के अंक में प्रकाशित

राम के चिरई, राम के खेत...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बोलनें - "राम के चिरई, राम के खेत। खाले चिरई भर-भर पेट।" ई कहावत त पुरान बा, बाकिर अब नया जमाना आ गइल बा। पहिले चिरई खेत से दाना चुगत रहली, अब कुछ लोग पूरा खजाना साफ करे में लग गइल बा। फर्क बस एतने बा कि चिरई के पेट भरत रहे, अब कुछ लोगन के तिजोरी भरत बा। मर्यादा भगवान श्रीराम के नाम के लूट होखे के चाहत रहे लेकिन कुछ भगत लोग एतना मर्यादा भी ना रख पवलें, रामलला के चढ़ावा पर हाथ साफ क दिहलें। भगवान के दान में श्रद्धा होला, विश्वास होला, करोड़ों भक्तन के आस्था होला। बाकिर जब गोरी- गजनी की मानसिकता के लोग रखवारी में लगिहे त नीयत बिगड़ जाला, आस्था में मौका खोजे लागेला। लूट के मौका। इ त पूरा सनातन धर्म की साथे धोखा हो गईल । छोट-मोट चोर त पुलिस के रजिस्टर में जल्दी चढ़ेला लेकिन व्हाइट कॉलर वाला टाइट पड़ेला। गरीब आदमी सौ-दू सौ रुपड्या रामजी की दानपेटी से उड़वले रहित त अबले चोरी में जेल पहुंच जाइत, लेकिन करोड़ों के खेल में पहिले बयान आई, फेर सफाई आई, फेर समिति बनी, फेर जांच चली, फेर रिपोर्ट आई, अउर जनता पूछत- पूछत थक जाई कि आखिर दोषी के बा? कुछ छोट-मोट लोग धरा जाई, असल खेलाड़ी के बचा लिहल जाई? हे राम ! तोहरे नाम पर राजनीति बहुत भइल, अब तोहरे चढ़ावे पर हाथ साफ होखे लागल त जनता के भरोसा बचावे खातिर रउरा अवतरित हो जाईं आ फेर राक्षसन के संहार क के कल्कि अवतार के सच पूरा क दीं। साँच सामने आवे के चाहीं। काहे कि भगवान के दरबार में देर हो सकेला, अंधेर ना। फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते-रफ्ते...
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