मनबोध मास्टर पूछलें- बाबा का हाल बा? बाबा बतवलें- उहे चमड़ी, उहे खाल बा। इहे हाल बा। बगुला दीठ लगवले बा। सिधरी चाल करति बा, रोहू पर बीतता। बगुला का पता ना बा, येह रोहू के पीठ केतना जाल-महाजाल से छिला चुकल बा। रोहू आजुओ मगन बा-होईहें वही जो राम रचि राखा। जवन रामजी चहिहै जब उहे होई त काहें केहू के कुभाखा बोले के ह। राष्ट्रीय अध्यक्ष जी इहे नसीहत दिहलें कि गुटबाजी खत्म कर के सांसद-विधायक लोग मिलके काम करें। बात सही बा। बयानबाजी आ मेलबाजी से कुछ हासिल ना होई। देश कॉल परिस्थिति पर नजर दौड़ा लीं। मुगलकाल रहे। बड़ा क्रूर सरकार रहे लेकिन तब्बो गोसाई बाबा आपन पोथी लिख के अमर क दिहलें। आज सनातनी सरकार बा लेकिन रामजी की दरबार में चढ़ावल पांच करोड़ के सोना मढ़ावल पोथी गायब बा। उ पोथी जवन हर हिन्दू सनातनी की घर में पूजल जाले। पढ़ल जाले। गावल जाले। नाम ह राम चरित मानस । विधर्मी शासक की शासनकाल में तमाम उल्टा बेयार बहला की बाद भी सुरक्षित रहि गईल लेकिन आजु सनातनी सरकार की कार्यकाल में ही गायब हो गईल। सब राम के ही लीला ह। आगे-आगे देखला के काम बा, रामजी की दंड से केहू बचि ना सकेला। रामचरित मानस के परम्परा बचाई। सोना गायब हो गईल त रोना मत रोईं। "का ए बगुला लगवला दीठ, बहुते जाल रगर गइल पीठ।" ई कहावत आजु के राजनीति, समाज अउर व्यवस्था पर एकदम सटीक बइठत बा। जेकरा पर जनता भरोसा कइले, ऊ बगुला भगत बन के अइसन ज्ञान बाँटे लागल कि आखिर में जनता के पीठे छिल गइल। देश में हर दिन नया-नया दावा हो रहल बा। कहीं विकास के पुल बनत-बनत बरखा में बह जा रहल बा, कहीं सड़क उद्घाटन से पहिले गड्डा खोजत फिरत बिया। कागज पर सब कुछ चमकत बा। आजकल सोशल मीडिया पर हर आदमी विशेषज्ञ बा। पाँच मिनट में अर्थशास्त्री, दस मिनट में विदेश नीति के जानकार अउर पंद्रह मिनट में न्यायाधीश बन जात बा। सच खोजे से आसान हो गइल बा ट्रेंड खोजल। झूठ अगर चमकीला पैकिंग में त उहे सबसे अधिका बिकाता। झूठ, दम्भ, पाखंड में डूबत उतिरात मनई के अपनी पगड़ी के चिंता नईखे दूसरा के पगड़ी उछलला में लागल बा। फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते रफ्ते...