रविवार, 10 मई 2026

10 मई 2026 के अंक में प्रकाशित

अब पंजाब के बारी बा..
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -हाल बेहाल बा। बड़ा बवाल बा। पंजाब के लेके मलाल बा। दिल्ली, बिहार, बंगाल की बाद अब पंजाब के ही बारी बा। ज़ब तक पूरा भारत पर कब्जा ना हो जाई दिल में चैन नईखे।
पंजाब में एगो प्रचलित कहावत ह -"जिद्दी कोठी ते दाने, ओहदी कमली वी सयाने"। एकर अर्थ ह -अर्थ ह की जेकरा घर में समृद्धि  धन (अनाज) बा ओकर बेवकूफ बेटवा भी दुनिया के लिए समझदार (सयान) मानल जाला। त सयान नेताजी कई राज्य में दूसर दल की नेता लोग के कुरसी छीन के पंजाब के कुरसी छिनला की तैयारी करत बाड़न। कल से, छल से, बल से, चाहें कौनो कौशल से पंजाब पर मार्च 27 की बाद आपन झंडा डंडा लहरा देबे के बा। अब हमसे उ का टकराई - जेकरा "पल्ले नई धेला, करदी मेला-मेला"। "आम आदमी पार्टी" की जेब में फूटी कौड़ी नईखे, एगो पंजाब पर एतना गुमान बा। नाम जेकर भगवन्त सिंह मान बा। दिल्ली में केजरी, बिहार में चाचा आ बंगाल में दीदी की बाद अब भगवन्त भईया ही निशाना पर हवें। एगो कहावत ह -"साड्डी न बुलाई, मैं लाढ़े दी ताई"। केहू बुलाई चाहे ना बुलाई हम हर जगह पहुंच जाईब। अबहिन बंगाल के झालमुडी आ मछरी भात के कमाल पूरा देश देखल। अब मक्का के रोटी आ सरसों के साग देखीं। भाँगड़ा नृत्य देखीं। सलवार समीज पर पगड़ी के परिधान देखीं। जेइसन देश ओइसन भेष बनाही के परेला। अबकी बाघा बार्डर तक चढ़ाई के आडर बा। सब एजेंसी लगा दिआई। लेकिन पंजाब भी लिआई।
पांच साल से राज सत्ता के सुख से वंचित सुनील जाखड़, परमिन्दर बराड़, अमरिंदर सिंह, चरनजीत सिंह, इंदर इक़बाल आ शीतल अंगुराल में जोश भरल जाई। आम आदमी वालन के तोड़ के आपन खास आदमी बनावल जाई। अबकी आम आदमी के अंतिम दीया बुता के न जाने क्या क्या किया टाइप काण्ड क दिहल जाई।
राजनीति के 'चस्का' अइसन लत ह कि चाय की चुस्की से शुरू होके मुसकी मारत कुर्सी के हवस तक पहुँच जाला। अब पंजाब की लोगन से आपन पुरान नाता बतावल जाई। जनता से रिश्ता जोड़ाई, भले बाद में रिश्ता खस्ता हो जा। वादा के बाज़ार लागी। गप्पन के बिटोर होई। आपन वाशिंग मशीन फेरु काम कईल शुरू क दी। एक से एक दागी के धो के धवल बना दिहल जाई। आ फेर कवनो भ्रष्टाचारी के पीठ ठोक के पवित्र बता दिहल जाई। कुरसी कब्जा के खेल चलत रही। असली मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी पर मौन आ सवर्ण लोग के वोट लेके पूछल जाई -आप हैं कौन?
फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीँ रफ्ते-रफ्ते...

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