मीतऊ! हमहूँ देश भक्त हईं ....
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बतवलें -बड़ा बवाल बा। महंगाई से मरत आम आदमी के जियल मोहाल बा। ऊपर से हाल इ बा कि कुछ बोल देईब त अंध भक्त भाई लोग झट्ट से देश द्रोही बता देई।
अरे मीतऊ! हमहूँ देश भक्त हईं ....। जवन देखिला उहे लिखिला।
देश में महंगी बढ़े त रउरा त्यागी बन जाईं। ना बन पाईं तबो देखाई कि हम त्याग करत हईं। जवना देश में 80 करोड़ लोग सरकार की मुफ्त की राशन पर जियत बा, ओही देश में कार आ कोठी वाला भी कोटेदार की इहा से राशन लेजाके दुकान पर बेच के नकदी बना लेत बा। देश में त्याग के नमूना भी अजबे अजबे लउकत बा। लोग इनोवा से जाता। फारचूनर से जाता। बस में, इ रिक्शा में बैठला पर फोटो खिचवावत बा,भले ओकर इनोवा और फारचूनर बस की पीछे पीछे खलिहे आवत बा रहे। लेकिन त्याग देखावल जाता। ईधन बचावत बा।
देश में भाषण बा - वन नेशन। सिस्टम दू तरह के बा।
आम आदमी से सोना खरीदला के मनाही कईल जाता। अब भला बताईं येह महंगी में सोना खरीदे के औकाते केकरा लगे बचल बा? तनी उनकी बारे में बोलीं-जे विदेश में जाके 200 करोड़ के हीरा जड़ाईल ब्लाउज के प्रदर्शन करत हई। पश्चिम बंगाल में जवना नेताजी की घरे सोने के गहना ही ना, पलंग बा सोने के, सोने खातिर। सोना देखे के बा त राजनेता, फ़िल्म अभिनेता, उद्योगपति की इहा देखीं। आम मनई त एगो मंगलसूत्र आ मेहरी के कान के बाली खातिर रोज घर से गाली सुनत बा।
देश के अर्थ व्यवस्था मजबूत करे के बा त जेईसे आम आदमी के मोबाईल मात्र तीन सौ में 28 दिन वाला महीना लगातार चलत बा वइसेही नेता आ मंत्री के चले के चाहीं। एम पी साहब के काहें साढ़े 12 हजार महीना मोबाईल खर्चा खातिर दिहल जाता? विधायक जी के 9 हजार रुपया काहें दिआता? तनी इहो सब त्याग देखा देऊ। तीन सौ में ही मोबाईल चला लेऊ। हंसी त तब आवत बा ज़ब दूसरा के बचत के ज्ञान देबे वाला महामानव जी खुदे लाखों के शूट दिन में ही तीन बेर बदलत हवें। कवने ना शास्त्री जी दुइगो धोती पर साल गुजार देत रहलें। कबो इहो सोचल कईल जा।
आपन हाल का बताईं। अंध भक्त बनला की चक़्कर में वाहन छोड़ के चार दिन पैदल का चल दिहलीं, लू लाग गईल, अब तबियत खराब बा। चार सौ के तेल बचवली तवन चार सौ डॉक्टर ले गईल। आ रहल बात विरोधिन के , त प्रधान सेवक जी वाहन के कम प्रयोग के बात कईलन त हमरी इहाँ के एगो सेवक जी जवन पहिले ऐके गाड़ी से घूमत रहलें उ अब पांच गो वाहन से चलत हवें।
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