रविवार, 21 जून 2026
21 जून 2026 के अंक में प्रकाशित
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा? बाबा बोलनें - "राम के चिरई, राम के खेत। खाले चिरई भर-भर पेट।" ई कहावत त पुरान बा, बाकिर अब नया जमाना आ गइल बा। पहिले चिरई खेत से दाना चुगत रहली, अब कुछ लोग पूरा खजाना साफ करे में लग गइल बा। फर्क बस एतने बा कि चिरई के पेट भरत रहे, अब कुछ लोगन के तिजोरी भरत बा। मर्यादा भगवान श्रीराम के नाम के लूट होखे के चाहत रहे लेकिन कुछ भगत लोग एतना मर्यादा भी ना रख पवलें, रामलला के चढ़ावा पर हाथ साफ क दिहलें। भगवान के दान में श्रद्धा होला, विश्वास होला, करोड़ों भक्तन के आस्था होला। बाकिर जब गोरी- गजनी की मानसिकता के लोग रखवारी में लगिहे त नीयत बिगड़ जाला, आस्था में मौका खोजे लागेला। लूट के मौका। इ त पूरा सनातन धर्म की साथे धोखा हो गईल । छोट-मोट चोर त पुलिस के रजिस्टर में जल्दी चढ़ेला लेकिन व्हाइट कॉलर वाला टाइट पड़ेला। गरीब आदमी सौ-दू सौ रुपड्या रामजी की दानपेटी से उड़वले रहित त अबले चोरी में जेल पहुंच जाइत, लेकिन करोड़ों के खेल में पहिले बयान आई, फेर सफाई आई, फेर समिति बनी, फेर जांच चली, फेर रिपोर्ट आई, अउर जनता पूछत- पूछत थक जाई कि आखिर दोषी के बा? कुछ छोट-मोट लोग धरा जाई, असल खेलाड़ी के बचा लिहल जाई? हे राम ! तोहरे नाम पर राजनीति बहुत भइल, अब तोहरे चढ़ावे पर हाथ साफ होखे लागल त जनता के भरोसा बचावे खातिर रउरा अवतरित हो जाईं आ फेर राक्षसन के संहार क के कल्कि अवतार के सच पूरा क दीं। साँच सामने आवे के चाहीं। काहे कि भगवान के दरबार में देर हो सकेला, अंधेर ना। फेरु मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते-रफ्ते...
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