गुरुवार, 23 मई 2013

पाथर के हाथी बा खइलसि, 15 अरब के डाढ़ा..

मनबोध मास्टर का नेता नाम से ही घिन हो गइल बा। एतना घिन जइसे नेता ना नेटा(पोंटा) होखें। घोटाला पर घोटाला होत देख बोल पड़लें- ‘ साग घोटाला, पात घोटाला। सुबह-शाम और रात घोटाला।’ एतना घोटाला की बाद भी देश चल रहल बा, इ सब कुछ पुण्यप्रतापी लोग के देन बा। जहें देखù तहें घोटाला। अब त घोटाला के नाम याद रखल भी मुश्किल हो गइल बा। जनसेवा के सूत्र हो गइल बा- ‘ जे कबहुं ना घूस लियो, कियो ना भ्रष्टाचार। ऐसे अधम बेलायक जीव को बार-बार धिक्कार।’ नेता लोग के कुत्र्ता जेतने लकालक उज्जर लउकत बा, ना जाने चेहरा पर काहें भ्रष्टाचार के ओतने कालिख पोताइल बा। भ्रष्टाचार शब्द त सामान्य दुनियादारी के शब्द हो गइल बा। लगत बा जेइसे भ्रष्टाचार बिन सब सून.। ओइसे त हमाम में सब नंगा बाड़न। केकर- केकर धोती उठा के देखल जा, लेकिन ताजा तरीन खुलासा में लोकायुक्त बहन जी आ तमाम आइएएस अधिकारी लोग के मुक्त कर के माया सरकार के दुगो मंत्री सहित 200 लोग पर आरोप पक्का क दिहलसि। बहन जी के एगो सपना रहे कि दलित महापुरुष लोग की नाम पर लखनऊ आ नोएडा में स्मारक बनों। माया सरकार के महापुरुख मंत्री लोग पाथर की हाथी के 15 अरब के डाढ़ा खीया दिहलन। दरअसल हाथी की नाम पर हाथीवाला मंत्री ही ना, हाथीराज के कुछ कर्ताधर्ता, इंजीनियर, ठेकेदार आ कुल 200 लोग मिलके 15 अरब पचा गइलन। आम आदमी अगर एक पूड़ी ज्यादा दबा देलन त अपच हो जाला, धोआइन ढेकार आवेला, लेकिन अपने देश के नेतन के पाचन शक्ति बहुत बेजोड़ ह। हाथी के डाढ़ा हजम कर लिहलन लेकिन डकार तक ना लिहलन। अब फंसल हवें त चिचिंयात हवें- बहन जी! हम त रउरे आदेश से पत्थर की हाथी में जान फूंकला के काम करत रहलीं। नारा लगावत रहलीं, हाथी नहिं गणोश है.। हम्मन अदना खिलौना रहलीं। जेतना चाभी रउरा भरलीं हम्मन ओतने दौड़लीं। प्यारी बहना, सॉरी बहना! बचा लो। इ पार्टी के लोग भी गजबे हवन। हम्मन फंस गइलीं त चोर। नाहीं त चबसावत रहलें- वंस मोर, वंस मोर। बहन जी! अइसे मजधार में छोड़ देइब त हम्मन बगैर मरले मरि जाब। हम्मन के पद, परमोशन, प्रतिष्ठा, पुरस्कार सब रउरी पांव छुअला के आशीर्वाद में मिलल रहे। देश में बहुत कुछ फिक्स होत बा। कहीं हम्मन के सजा भी पहले से ही फिक्स त ना हो गइल। दुनों मंत्री घिघियात रहलें आ पाश्र्व में एगो कविता सुनात रहल-
 पाथर के हाथी बा खइलसि, 15 अरब के डाढ़ा। 
मंत्री जी लोग गटक रहल बा, घोटाला के काढ़ा।। 
लोकायुक्त किये खुलासा, बात कहत हैं पक्की। 
दो सौ जने आरोपित भइलें, कब पिसिहें जेल में चक्की।।
- मेरा यह भोजपुरी व्यन्ग्य राष्‍ट्रीय सहारा के 23/5/13 के अंक मे प्रकाशित है .

गुरुवार, 16 मई 2013

पाकिस्तान शरीफ नवाजा, कवना खुशी बजावहुं बाजा...

पड़ोसी देश में लोकतंत्र के राजा चुना गइलें। भारत में भी कुछ लोग फुलझरी छोड़ के खुशी मनावे लगलें। मनबोध मास्टर का येह कुटनीतिक खुशी के बहुत एतराज बा। पूछ पड़लन- ‘ पाकिस्तान शरीफ नवाजा। कवना खुशी बजावहु बाजा।।’ शरीफ नाम होवले कवनो मनई शराफत से व्यवहार निभा दे एकर कवन गारंटी बा। भारत और पाकिस्तान की संबंध में नेकी और बदी के अंतर साफ दिखेला। एगो बात के प्रशंसा कइल जा सकेला उ इ कि जवना पाकिस्तान में गोली बम बारुद आ सर कलम के कुसंस्कृति सदा से गूंजत रहे ओइजा बुलेट की जगह बैलेट से शासन बदल गइल। भारत आ पाकिस्तान के सीमा-सरहद मिलेला लेकिन दुनों देशन के दिल कब मिलल। दुनो के राह जुदा-जुदा बा। शरीफ साहब लाख शराफत के बात कहें दुनो मुल्कन के बीच के तनाव के माहौल ठंडा ना हो सकेला। शरीफ के जीत जम्हूरियत के जीत , शरीफ के शराफत पाक की नापाक धरती की सीमा में ही शोभा देई। शरीफ की जीत पर अमेरिकी, ब्रिटेनी, चीनी, ईरानी, सऊदिआई, अरबिआई, तुर्किआई, कुबैतिआई खुश हो सकेलन हम काहें बाजा बजायी, नाचीं गायीं जश्न मनाई। ऊपर उल्लेखित देश के लोग मख्खन मार मलाई लगावें त कवनों बात ना लेकिन हम काहें चाटुकारिता के चिकन-बिरयानी के र्चचा करीं जब सदा से शाकाहारी के समर्थक हई। शरीफ साहब को बिना मांगे कुछ सुझाव देके पड़ोसी धर्म के निर्वहन कइल जरूरी बा। पाकिस्तान में पहिला चुनौती बा- तालिबान आ कट्टरपंथी जमात से निजात के। काहें कि इ कट्टरपंथी भारत जइसन शांत देश के अस्थिर करे की कोशिश में लागल रहेलन। दूसरका चुनौती बा- कश्मीर मुद्दा। जब तक इ मुद्दा ना मरीं, मतलब की जीवित रही तब तक घुसपैठ आ गोलीबारी ना रुक सकेला। पाकिस्तान का चाहीं कि आपन आर्थिक स्थिति मजबूत करें। भटकल युवावर्ग के रोजी -रोजगार, काम-धंधा में लगा दें। येह से इ लाभ होई कि खाली दिमाग शैतान के घर वाली कहावत से छुट्टी मिली। बेरोजगारी रही, बेकारी रही, गरीबी रही, भूखमरी रही, लाचारी रही त कवनो ना कवनो रूप में आतंकवाद के फसल लहरात रही। आतंकवाद बढ़ी त भारत के शांत चित्त अस्थिर हो जाई। शरीफ साहब! रउरा इहां खाली धुंआ उठेला त हमरे इहां आग कइसे लाग जाला? पाकिस्तान, जहां के सेना बेलगाम, जहां के आईएसआई बेलगाम। छियाछठ बर्ष बाद जहां जनतंत्र ने जोरदार दस्तक दी है, वहां की जनता को बहुत-बहुत बधाई। इ कवित्तई -
 पाकिस्तान शरीफ नवाजा। कवना खुशी बजावहुं बाजा।। 
एक तराना एक फसाना। आतंक का रहा घराना।। 
हमको प्यारा चांद व तारा। तुमको भाये क्यूं अंधियारा।।
 केतना तेल लगावहुं घोंचू। सोझ भयो ना कुक्कुर पोंछू।।
- narvdeshwar pandey dehati ka yah bhojpuri vyngy rashtriy sahara ke 16/5/13 ke ank me prkashit hai .

गुरुवार, 9 मई 2013

माहिल, मारिच, कंस आ शकुनी मामा के प्रकार..

मनबोध मास्टर की दिल में मामाजी के प्रति अगाध श्रद्धा रहल। अपनी बतकही में बेर-बेर मास्टर इ बात दोहरावत रहलें कि एक अक्षर की ‘ मां ’ से जब एतना प्रेम त डबल अक्षर के ‘मामा’से दूना भावनात्मक लगाव रहे के चाहीं। मास्टर की विचार से ठीक उल्टा हमार विचार बा। इतिहास गवाह बा, मामाजी लोग के चेहरा खलनायकीवाला ही बा। मामाजी लोग के अंत की पीछे भांजा लोग की योगदान के भी ना भुलाइल जा सकेला। त्रेतायुग में एगो मामा रहलन मारिच। भेष बदलला में माहिर रहलन। रावण की मति में पड़ के अस सोने के मृग बनलन की रामजी की हाथे गति बन गइल। मरते दम भांजा की कार्यसिद्धि खातिर हाय लक्ष्मण! हाय लक्ष्मण! के आवाज लगा के भ्रम की भंवरजाल में सीता सती के फंसा दिहलन। द्वापर में एगो क्रूर आ आ घटिया टाइप के मामा भइलन कंस। अपनी ही बहन-बहनोई के जेल की कालकोठरी में डाल के पैदा होते ही भांजी- भांजन के हत्या करत रहलें। भला भइल कन्हैया के की अवतार होते ही सब लोग नींदासन में आ गइलें आ भांजा नंद की यहां पहुंच गइल। मामाजी के मार के नाना ऋण के उदृण हो गइलन। येही युग में पैदा भइलन एगो धुर्त मामा। नाम रहल शकुनी। अस मकुनी पकवलसि की भाजंन के भड़का के महाभारत करा दिहलसि आ हस्तिनापुर के नाश करा दिहलसि। जे आल्हा सुनले होई उ कुचरा मामा माहिल के दास्तान सुनले होई। उहो खलनायक ही रहल। मामा आदर की जगह जब गाली के शब्द भइल त ट्रेन में बेटिकट यात्रा करे वाला पढ़वइया लरिकन की मुंह से टीटी के ममवा कहत सुनल गइल। आपराधिक प्रवृत्ति के लंठ वर्दीधारिन के ममवा कहत सुनल गइलन। आजकल एगो और मामा के जगह-जगह र्चचा बा। भांजा की करनी से रेल मंत्री के उप नाम मामा हो गइल। रेल मंत्री पवन बंसल के मामा बनवला में भांजा विजय सिंगला के बहुत योगदान बा। येह देश के मामाजी लोगन से बचवला के जरूरत बा। मामालोग चंदामामा जइसन प्यारा मामा ना रहल। उ माहिल, मारिच, कंस, शकुनी आ पवन बंसल टाइप के हो गइल बाड़न। देश के दुगो बड़वर राजनीतिक दल पीएम पद के जवन उम्मीदवार बनावत हवें, बेशक उ मेहरीविहीन हवें , संतानहीन हवें लेकिन भांजा-भांजी त जरूरे होइहन। सो हे पंचों! येह देश के मामा -भांजन से बचाइब सभे। बहुत सोच-समझ के चुनब सभे ना त फिर बैताल ओही डाल। एगो चार लाइन के कविता देखीं-
 माहिल मारिच कंस आ शकुनी, मामा के प्रकार।
 एक भांजा की कारने, मामा भयो लाचार।।
 मामा के मुंह लागल कालिख, भांजा खइलसि घूस हजार।
 बांसे लुग्गा टंगाइल बाटे, सांसत में मौनी सरकार।।
- Narvdeshwar pandey dehati ka yah bhojpuri  vyngy rashtriy sahara ke 9/5/13 ke ank me prkashit hai .

गुरुवार, 2 मई 2013

भारत की सीमा के भीतर घुस अइलें कुछ चीनी बंदर


बुधवार के पहली मई रहल। पहली मई ऐह लिए मशहूर ह कि आज के दिन मजूर लोग की नावे क दिहल बा। मनबोध मास्टर आज मुंह ओरमवले घरे बइठल हवें। येह लिए ना कि आज मजदूर दिवस ह आ छुट्टी के दिन ह। उनकी मुंह ओरमवले के कारन बा चीनी घुसपैठ। हालांकि चीन त बहुत पहिले से ही घुसल बा। सीमा नियंतण्ररेखा ही ना उ त हम्मन की घर के भीतर ले समा गइल बा। मोबाइल फोन, टेलीविजन, कंप्यूटर, टार्च , लरिकन के खिलौना, इलेक्ट्रिक सामान से लेके किचन ले समाइल बा चीन। हम्मन के भावना देखीं, स्वदेशी के नारा देलीं जा लेकिन प्रयोग विदेशी कइला में गर्व करीलां। हमार भारत महान हवे। हम्मन महान देश के महान नागरिक हई जा। रोज-रोज बलात्कार के खबर बहुत मगन होके पढ़ेलींजा। बड़ से बड़ घोटाला के बिना हाजमा के गोली खइले हजम क लेलीं जा। कुछ चीनी बंदर हमरी भारत माता की छाती पर आपन पांचवा तंबू भी गाड़ दिहलन लेकिन हम्मन के नपुंसकता भी बेजोड़ बा। विदेश मंत्री से लेके प्रधानमंत्री तक मुंह में दही जमा के मख्खन मरला में लागल हवें। हम्मन ‘ अतिथि देवो भव’ के परंपरा के पोषक हई , तब्बे त आतंकवादिन के भी माफी देके पुन्य कमाइल जाला। गलती से कवनो आतंकवादी अगर जेल चलि जाला त एतना स्वागत में विरियानी खिआवल जाला जेतना ओकर बाप-दादा ना खइले होइहें ना खिअवले होइहन। चीन लगातार घुसपैठ करत बा हम हईंकी कोयला की कालिख से चेहरा पुताके होली के मजा लेत हई। भइया! ‘ आत्म सम्मान’ भी कवनो चीज होला? हम मान-सम्मान, स्वाभिमान, अपमान सब कुछ भुला के मौनासन में हई। का येही दब्बूपन से विश्व में हम भारत के महाशक्ति बना पाइब? हम खाली सरकार पर आरोप लगा के अपनी दायित्व से ना बचि सकेलीं। महान भारत के महान नागरिक भइला की नाते हम्मन के चाहीं कि चाइनिज सामानन के वहिष्कार कइल जा। कवनो देश के कमजोर करे के होखे त ओकर अर्थिक ढांचा ढहावे जरूरी होला। चीन के पचास फीसदी अर्थ व्यवस्था भारतीय उपभोक्ता बाजार पर निर्भर बा। अगर हम्मन चाइनिज सामानन के बहिष्कार क दिहलीं जा त समझीं आधा चीन के कब्जा क लिहलीं जा। भारतीय सीमा में बीस किलोमीटर घुसल चीनी बंदरन के चहेटे खातिर सेना लगा दिहल जरूरी बा आ घर-घर में घुसल चाइनिज खातिर दृढ़ संकल्प शक्ति जरूरी बा। आई समें दुनो ओर से हमला क के चीन फतह कइल जा-
 भारत की सीमा के भीतर, घुस अइले कुछ चीनी बंदर।
 तोड़ नियंतण्ररेखा देखीं, चलि अइलें बीस किमी अंदर।।
 देश दशा पर मुंह ओरमवलें, ना बोलत सरकार धुरंधर। 
घर-घर में चाइनिज घुसल बा, हमें चिढ़ावत हवें लफंदर।।

-  नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती का यह भोजपुरी व्यंग्य राष्ट्रीय सहारा के २/५/१३ के अंक में प्रकाशित है .
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