सोमवार, 3 जनवरी 2011

हे भ्रष्टाचार तोहार जय हो, विजय हो...

केन्द्रीय सतर्कता विभाग के पूर्व आयुक्त प्रत्यूष सिन्हा भ्रष्टाचार से चिन्तित हवन। उनकर कहनाम बा- ‘हर तीसरा भारतीय भ्रष्ट’। हम कहता हई रिटायर भइला के बाद काहे बुद्धि खुलल ह। भ्रष्टाचार पर नजर रखे वाली विश्व स्तर के संस्था ट्रांसपरेन्सी इन्टरनेशनल जवन भ्रष्ट देशन के सूची बनवले बा ओहमा भारत के नंबर 84वां स्थान पर बा। इ दूनो बात सुन के हमार खोपड़ी पौराणिक काल की ओर घुमि गइल। सतयुग, द्वापर, त्रेता के एक-एक कहानी आंखि की सामने नाचेलागल। अचानक ना चाहते भी मुंह से निकर गईल- हे भ्रष्टाचार तोहार जय हो! विजय हो!
वइसे भ्रष्टाचार क शाब्दिक अर्थ ज्ञानी लोग गढ दिहलें जे अचार-विचार से भ्रष्ट उ भ्रष्टाचारी। ज्ञानी लोग भ्रष्टाचार की कई रूप-स्वरूप के बड़ी-बड़ी व्याख्या कइले हवें, यथा-लूट, डकैती, चोरी अपहरण, हत्या, झूठ, फरेब, धोखाधड़ी, विश्वासघात, रिश्वतखोरी, हरामखोरी, लालच, छल...। जैसे हरि के हजार नाम, वैसे भ्रष्टाचार के भी कयी नाम। येही से बंदा कहता- हे भ्रष्टाचार तोहार जय हो, विजय हो...।
धर्म में आस्था रखे वाला भाई-बहिनिन से माफी चाहत, भ्रष्टाचार के गुणगान के लिए कुछ उदाहरण अपने समझदानी से देत हईं। भगवान भोलेनाथ के लड़िकन, कार्तिकेय व गणेश में पृथ्वी के भ्रमण की होड़ लगल त गणेश महराज क चूहा षड़ानंद के मोर से भला कैसे तेज दौड़ सकत, सो गणेश जी ने माता-पिता के ही परिक्रमा क लिहलें। इ कौन इमानदारी ह भाई? श्रीहरि बामन रूप में राजा बलि से तीन डेग जमीन की बदला में तीनों लोक आ बलि के पीठ भी नपला लिहलें। हरिश्चन्द्र अइसन सत्यवादी के भ्रष्टाचार की जाल में फंसा के सांसत में डाल दिहल गइल। चक्रवर्ती सम्राट के डोम राजा की घरे बिकाये के पड़ल। बेटा बिकाइल, मेहरी नीलाम हो गइल। मरघट के रखवाली करे क पड़ल। गौतम ऋषि के नारी अहिल्या से देवतन के राजा इंद्र व चंद्रमा छल कइलें। रामजी, बाली के ताड़ की आड़ से मार दिहलें, इहो एगो छले ह। महाभारत काल में त भ्रष्टाचार के दुष्टान्त भरल पड़ल बा। पांच पति के एगो पत्नी...। जुआड़ी दांव पर लगा दिहलें। मामा शकुनी अइसन मकुनी पकवले की भांजा दुर्योधन के जितवा दिहलें। धृतराष्ट्री व्यवस्था में द्रोपदी क चीरहरण हो गइल। लाक्षागृह में आग लगवावल, चक्रव्यूह के रचना..., अभिमन्यु क वध...। इ सब भ्रष्टाचार ना त का ह?
 उपभोक्तावादी संस्कृति आ बाजारवाद की येह दुनिया में जे भ्रष्ट आचरण ना सीखी उ बउक कहाई। बच्चा ईमानदारी से परीक्षा दई त मेरिट में पिछड़ जाई। भ्रष्टाचार के गुणा-गणित वाला के देखीं कइसे छलांग लगावत, छरकत आगे बढल चल जात हवें। ई भ्रष्टाचार के ही कृपा बा कि जेकरा सलाखन की पीछे होखे के चाहीं उ सदन के सोभा बढ़ावत हवें। न्याय क मंदिर में जहां न्यायदेवता बैठल हवें ओहिजा पेशकार नाम क जीव रहले भेंट लेता, तब तारीख देता। येही से बंदा कहता- हे भ्रष्टाचार तोहार जय हो, विजय हो..

उल्लूगीरी क भी आपन महत्व ह

 उल्लू! एगो प्राचीन पक्षी। एतना प्राचीन कि जब ब्रह्माण्ड के संरचना भइल त विष्णु भगवान की नाभि से कमल निकरल आ ओपर ब्रह्मा जी पैदा भइलन। मतलब ब्रह्मा की पैदाइश से पहिले शेश शैय्या पर सुतल विष्णु भगवान आ उनकर पांव दबावत लक्ष्मी मैया। ओही लक्ष्मी मइया के वाहन हवें उल्लू। हम अपना ‘उल्लूगिरी’ से इ सिद्ध क दिहलीं कि उल्लू के पैदाइशी ब्रह्मा जी से भी पहिले भइल होई। ‘उल्लू’ केवल एगो पक्षी ना ह। ओकर कई गो रूप-स्वरूप बा। जबतक देश-दुनिया में उल्लूगीरी रही। गदहन की राज में लात आ बात क घमासान चली। केहू यदि बड़ा चालाक बनत बा त ओकरा पीछे जरूर कवनो ‘उल्लू की पट्ठा’ के हाथ बा। केहू यदि केहू के ‘उल्लू बनावत’ बा त उल्लू बने वाला के ही दोष बा। सब जान-बूझ के उल्लू बनल मजबूरी बा। उल्लू प्रकृति क ग्राफ बैलेंस करेवाला जीव ह। यदि दुनिया में सब चालाक ही हो जाई त व्यवस्था गड़बड़ा जाई येह लिए कुछ उल्लू टाइप के लोग भी रहे के चाही। तबे होशियार लोग आपन ‘उल्लू सीधा’ करत रहिहन।
            तनी सोचीं, अगर दिन में भी उल्लू का दिखाई देवे लागे बत का होई? हो सके लक्ष्मी मइया के कवनो जाम की झाम में अकेले छोड़ के फुर्र से उड़ जा। लक्ष्मी मइया धन के देवी हईं कि जमाना एडवांस भइला की बाद भी कवनो लग्जरी गाड़ी के आपना वाहन ना बनवली। जेतने महंगा गाड़ी ओतने खर्चा। लक्ष्मी मइया की वाहन की मेन्टीनेंस पर कानी कौड़ी क भी खर्चा ना बा। दिनभर उल्लू बेचारे क लउकबे ना करी आ रात की बेरा कवनो मुड़ेर पर यदि मुर्रर... मुर्रर... बोलले त लोग का अपशकुन ही लागी। वर्ष में एक दिन अइसन पंक्षी के पूजा आ आदर के व्यवस्था बनावेवाला भी उल्लू ना रहलन। असों की दीवाली पर खुशी मनावल गइल। दीप जलावल गइल। पूवा-पकवान खाइल-खियावल गइल। लक्ष्मी मइया के जयकार मनावल गइल। आ जइसे चोर अमवस्या जगावें लें, ओइसे अपनी अन्दर की ‘उल्लूगीरी’ के जगावल गइल। फिर वर्षभर आपन उल्लू सीधा कइल जाई लोग के उल्लू सीधा कइल जाई लोग के उल्लू बनाके। दीपावली मनल, गोधन कुटाइल अब छठ के तैयारी बा। बाजार से सब फल सब्जी खरीद के चढ़ावल जाई।

जवन भइल बढ़िया भइल, जवन होई उहो ठीक होई


सब आशंका निरमूल हो गईल। जवन भइल बढ़िया भइल। आगे जवन होई उहो ठीक होई। अयोध्या की फैसला पर इहे कहल जा सकेला। सब जीत गइल। केहू के हार ना भइल। दुनिया के सबसे बड़ मुकदमा पर फैसला आइल। सब स्वागत कइल। फैसला में कहल गइल कि जहां विराजमान हवें उहें रहिहे रामलला। मतलब रामललावादी लोग के भी जीत हो गइल। निरमोही अखाड़ा जीत गइल। विवादित जमीन के एक तीसरी ओहु के मिल गइल। हिन्दू महासभा जीत गइल, गर्भ ग्रह में ही रहिहन रामलला। सुन्नी वक्फ वोर्ड भी जीत गइल। एक तीसरी जमीन ओहू के मिली। भाजपा जीत गइल, काहें कि ओकर मुद्दा ‘राममंदिर’ कायम रहल। कांग्रेस जीत गइल, काहें कि ताला खोलववला से लेके ढ़ांचा ढ़हववला ले केन्द्र में ओही के सरकार रहल। प्रशासन जीत गइल, कि एतना बड़वर फैसला की बाद भी एगो ‘पत्ता’ ना खरकल। जवन भइल बढ़िया भइल।
     अयोध्या फैसला पर जेकर प्रशंसा कइल जा, ओहमें सबसे उपर बा ‘संयम’। सब लोग संयम से काम लिहल। उन्मादी लोग भी संयम से रहल भले प्रशासन की डंडा की ही बदौलत। प्रशासन के डंडा भी संयम में रहल, अनावश्यक ना चलल। इ एगो बड़वर परीक्षा के घड़ी रहल। येह परीक्षा में सब पास हो गइल। हिन्दुस्तान क अमन, शांति, भाईचारा, एकता बनल रहल, बनल रहो।
   देश की आन-मान सम्मान पर कवनो आंच ना आइल, एकरा खातिर देश के करोड़ो अमन पसंद लोगन के लाख-लाख प्रनाम। उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के भी सराहना होखे के चाहीं। अयोध्या विवाद के लेके सरकार कवनो अशांति ना पैदा होखे दिहलसि। जरूरत एह बात के बा कि इ सजगता आगे की दिनन में भी बनल रहो। गांव की एगो निपट जपाट आदमी से जब पूछलीं कि- ‘काहो गबड़ू काका अयोध्या फैसला से खुश हव..’ उ टप्प से कहलें- ‘बाबू जवन भइल, बढ़िया भइल।’ गबड़ू काका की बात में दम रहल, कहलन येह समय एक ओर से ललकारे वाली सपा चुप्प बा त सब ठीके बा। बाबू, बवाल के चाहत बा। इ त नेतवे आग लगवा दे लें। केतना शांति से निकर गइल एतवर बड़वर ममिला, जीवन में कबो ना देखलीं ना सुनलीं।
     गबड़ू काका की बात की दम पर हमहू कहत हईं जवन भइल बढ़िया भइल, जवन होई उहो ठीक होई। सबके सनमत दें भगवान।

मन्त्री जी अइलें वसूले खातिर जर्ती..

गेहूं की पिसायी में जर्ती कटला के बात रउरा सभे सुनले होइब। जर्ती एक प्रकार के वसूली ह। जब आदमी पिसात होखे त जर्ती कइसे कटाला, इ बात गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ की बात से जनलीं। दरअसल पूरा पूर्वांचल नवकी बेमारी से त्रस्त बा। कुछ लोग ऐके जपानी बुखार त कुछ जेयी कहत हवें। मेडिकल कालेज में लगभग तीन सौ बच्चा लोग मच्छर ससुरन की कटला से भर्ती हवन। येह साल तकरीबन ढ़ायी सौ लाश मेडिकल के बहरियाइल जवन इंसेफेलाइटिस से पीड़ितन के रहल। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर ही ना बलिया, बिहार, आजमगढ़ आ मऊ के मरीज भी एइजा मरे खातिर आवत हवें। मेडिकल कालेज में बेड के इ हाल बा एक-एक पर तीन-तीन। सोमवार के स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिसिर जेयी पर लेयी लगावे आइल रहलन। अफसरन-डाक्टरन से बइठक कइले, फुर्र हो गइलें। अइसन संवेदनहीन, कठकरेजी मंत्री हम ना देखलीं। मंत्री जी ! रउरा भगवान ना हयीं कि मेडिकल कालेज में मरत लरिकन के बचा लेइब। मेडिकल कालेज में जइतीं त जवन मायी-बाप अपनी बच्चन के लेके भर्ती हवें उनकी पीड़ा पर कुछ मरहम लागि गइल रहित। उजरत कोख पर आंसू बहावत मायी-बोहिन लोग के आंसू पोछि दिहले राउर अंगोछा मैला ना हो जाइत। रउरा, माथे पर हाथ धइले कवनो अइसन बाप जवना के उत्तराधिकारी लेबे वाला बेटा ना बचल ओकरा माथा पर आपन हाथ भर रख देतीं त उ संतोष के सांस लेइत। लोग रोवत बा, फेंकरत बा। लइका मरत हवें। लाश बहरियात बा। दवा करावत में गहना-गुरिया, खेती-बारी बिकाता। लेकिन राउर ‘हाथी छाप’ सरकार ‘डाढ़ा खाइल आ लीद कइल’ में ही सीमित बा। लोग के लइका मरि गइल, राउर संवेदना मरि गइल। मुअल मनयी के सूतक सांसत में डाल देला। दया भाव देखइतीं त दुआ मिलित। रउरा अइलीं, गइलीं। लेकिन गोरखपुरिहन के झकझोर गइलीं। सदर सांसद योगी आदित्यनाथ कहलन कि मंत्री जी गोरखपुर में वसूली करे आइल रहलें। योगी कहलें कि क्षेत्र में आके मेडिकल कालेज ना गइलें इ त बेशर्मी के हद बा। नगर विधायक डाक्टर राधामोहन दास अग्रवाल कहलन कि मंत्री गैर जिम्मेदार हवन। उनकी में ना र्इमानदारी बा, ना संवेदना। हम त इहे कहत आपन बतकही बंद करत हयीं हे अनंत! राउर कथा अनन्ता मेडिकल कालेज भरोस भगवंता।
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