शुक्रवार, 26 अगस्त 2011

हैंडपंप उखड़वाकर थानों में जमा होंगे

मंडल में इंसेफेलाइटिस की कहर को रोकने के लिए गांवों-शहरों में लगे छोटे हैंडपंप उखड़वाकर थानों में जमा होंगे। मंडलायुक्त के. रविन्द्र नायक ने मंडल के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि हैंडपंप उखाड़ने से यदि कोई रोकता है तो उससे बलपूर्वक निपटा जाए। इसमें संदेह नहीं है कि छोटे हैंडपंपों के अशुद्ध पानी के कारण जलजनित संक्रामक रोग फैल रहे हैं।यदि ग्रामीण अथवा शहरी क्षेत्र में अशुद्ध जल पीने से बीमारी फैलती है तो सम्बंधित अधिकारी दोषी माने जाएंगे। मौत होने की दशा में उनके खिलाफ धारा 304 ए का मुकदमा दर्ज कराकर कार्रवाई की जाए। साथ ही सम्बंधित ग्राम प्रधान को पदच्युत कर दिया जाए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में खंड विकास अधिकारी व नगरीय क्षेत्र में अधिशासी अधिकारी से अनुपालन कराने को कहा है। उन्होंने स्वीकृत इंडिया मार्का हैंडपंपों को युद्ध स्तर पर लगाने का निर्देश दिया है।
  मंडलायुक्त महोदय हम आप को बतावे - जब यही चापाकल  आया तो लोगो ने कुए का पानी पीना छोड़ दिया . गावो में सबके यहाँ एक्वागार्ड या इंडिया मारका नहीं है .  चापाकलो को उख्द्वाकर थाने में  जमा करा देगे तब तो गरीब आदमी पानी बिना ही मर जायेगा . आप को पता होगा आप के ही परीछेत्र कुशीनगर में प्रशासनिक संवेदनहीनता से मुसहर बस्तियों की हालत इतनी बिगड़ गयी है कि इन्हें न भरपेट भोजन ही मिल पा रहा है और न ही काम।गरीबों को दो वक्त की रोटी का जुगाड़ भी कठिन है। ऐसे में घोंघा भूनकर भूख मिटाना इनकी नियति बन गयी हैं। हम तस्वीर दिखा रहे है दुदही ग्राम पंचायत के टोला महियरवां मुसहर बस्ती की । जहां कुपोषण के शिकार बच्चों की मौत को अज्ञात बीमारी माना जा रहा है।भूख व गरीबी के आगे बेबस  नरेश व उसकी भतीजी पोखरे व नहर के किनारे से लाये घोंघा को तोड़ कर उसमें से मांस निकाल कर खा रहे है पूछने पर जवाब दिया कि खाने को रोटी नहीं है तो क्या करें? मुसहर बस्ती में लगा इंडिया मार्का हैंडपम्प गंदगी व चारों ओर पानी से घिरा होने के कारण पानी लाने कम ही लोग जा पाते हैं। हमारे मित्र पत्रकार अनिल पाठक ने जो अपनी रिपोर्ट भेजी है, उसे अखबार   ने २६ अगस्त २०११ को प्रमुखता से प्रकाशित किया है, गरीब घोंघा भूनकर भूख मिटा  रहे है, आप चापाकल उखडवा कर थाने में जमा करायेगे . इस देश में बहुत अनाज भण्डारण के अभाव में सड़  रहा है, गरीब भूखो मर रहा है, लगता अब पानी बिना मरेगा .
-नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती 
,गोरखपुर

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

‘अन्ना लीला’ आ ‘अन्नागीरी’

अन्ना की आंदोलन के गूंज देवलोक में पहुंचल। नारद बाबा आपन वीणा बजावत अइलें। आंखों देखल हाल बतावत हवें- दिल्ली की रामलीला मैदान से गांव -गांव तक ‘अन्ना लीला’ आ ‘अन्नागीरी’ चलत बा। शोर एतना जोर रहे कि पेट में लईको ‘अन्ना- अन्ना ’ बोलत बा। गेट पर ‘अल्ट्रासाउंड कानूनी रूप से अवैध’ के बोर्ड लगवले ‘जनमरवा डाक्टर’एवार्सन के केस निपटा के अन्ना आंदोलन में कूदल हवें। प्रख्यात ज्योतिषी ‘धूर्ताधिराज’गर्भवती महतारी लोग के बतवलें की जन्माष्टमी के दिन जवन लईका  पैदा होई तवन बहुत प्रतापी होई, जल्दी दक्षिना देई, हमरा आंदोलन में जाये के बा। महतारी लोग असमय की पेट फरवा के लईका पैदा करावत हई। लईका ‘केंहा-केंहा’ की जगह पर ‘अन्ना-अन्ना ’चिल्लात हवें। भारी कमीशन की खरीददारी पर मंगावल कई गो टीका जनमते लईका के खोंसाइल बा। महतारी के दूध अमृत समान बतावेवाली नर्स लईका की मुंह में बोतल थम्हवले बाड़ी। बोतल में ‘हरहरगंगे’ ग्वाला वाला दूध भरल बा। बुझनेक लईका चाना मामा आ चेउंआ से ना टीवी की रिमोट से बाझत हवें। ‘ ज्ञान बेचवा’ स्कूल में बहुत सिफारिश की बाद नाम लिखाता। नाम लिखइला की पहिले गार्जियन का ‘पर-इच्छा’ से शिक्षा की दुकान में कापी-किताब, कपड़ा, जूता-मोजा-टाई महंगा दाम पर खरीदे के पड़त बा। नौकरी खोजला में खेत गिरवी होता। जर-जोगाड़ पर लक्ष्का के नोकरी लागत बा त बाबुजी मंदिर मिलावट वाली मिठाई चढ़ा के ‘उपरवार’ के मन्नत मांगत हवें। दहेज कानूनन जुर्म बा लेकिन लईका की विवाह में खींच के लियात बा। जज साहब के सामने ही ‘पेशकारी’ आ ‘नजराना’लियात बा। ‘मुकदमाबझवा’ वकील मोवक्किल से फीस लेके कोर्ट के वहिष्कार क के अन्ना की आंदोलन में कूदल हवें। ‘चंदामंगवा’ समाजसेवी लोग धंधा से जुटावल पइसा से कुछ मोमबत्ती मंगाके कैंडिल जुलूस निकारत हवें।महापुरुष की मूर्ति की आगे बइठ के ‘सूदखोरवा’सेठ अंडा के आमलेट खाके उपवास पर हवें। सुरक्षा में लगावल पुलिस वसूली में मस्त बा। अन्ना के जूता आ किरण वेदी के पर्स भी ईमानदार लोग उड़ा लेले बा। प्रतिवंधित गुटखा आ दुर्गधित दारू से जब रामलीला मैदान बंसा उठल त अन्ना का कहे के परल, गुटखा आ दारू पी के जनि आई। चैनेल वाले आपन बैट्री फूंकत हवें, अखबारवाला अन्ना की खबर से पन्ना रंगत हवें। कई गो ‘कुरफतिये’ लागले रहि गइलें लेकिन एतना बड़वर आंदोलन के बड़वर बात इ बा कि कहीं कवनो हिंसा ना भइल। अब सब पूछत बा-
न्ना चाचा तूहीं बतावù, कहिया अनशन टूटी। भ्रष्टाचार के टांगल हड़िया, अब कहिया ले फूटी।।

नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती का यह भोजपुरी  लेख राष्ट्रीय सहारा गोरखपुर के २५ अगस्त २०११ के अंक में प्रकाशित है .

जज ने भ्रष्टतंत्र पर किया प्रहार

  न्यायाधीश अजय पांडे के जज्बे को
सलाम
अन्ना के मंच से बुधवार को जनता को संबोधित करते हुए न्यायाधीश अजय पांडे ने एक वाकया सुनाया-
 हां मैं एक न्यायाधीश हूं। नई दिल्ली के वीआइपी क्षेत्र में अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी भी रहा। अब तीस हजारी में सिविल जज के पद पर कार्यरत हूं। कई बार यहां आया, बाहर से ही लौट गया। मन में डर था कि क्या होगा? अगर अन्ना के आंदोलन में शामिल हुआ तो क्या होगा? लेकिन अंतरात्मा ने मुझे बार-बार धिक्कारा। रामलीला मैदान में स्वयंसेवकों ने जन-लोकपाल के पर्चे दिए तो उन्हें पढ़कर रहा नहीं गया। मन की आवाज सुनी और अपनी बात कहने के लिए आपके सामने हूं। दो वर्ष मैं नई दिल्ली में अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी रहा। उस दौरान एक सांसद की गाड़ी पर संसद का पार्किंग स्टिकर गलत लगा था। जिसमें दोषी सांसद को ठहराया जाना था, लेकिन आरोपी बनाया गया ड्राइवर। ड्राइवर का कसूर सिर्फ इतना था कि वह गरीब था। कल उसकी जगह मेरा बच्चा होगा, तुम्हारे परिवार का कोई सदस्य भी हो सकता है। जब तक कि भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए कोई सख्त और पारदर्शी कानून नहीं बनेगा तब तक ऊपरी दबाव के चलते किसी न किसी व्यक्ति पर दोष थोपा जाता रहेगा। न्यायपालिका पुलिस से कहती है जांच करो, पुलिस वाले नहीं करते। क्योंकि व्यवस्था ही भ्रष्ट हो चुकी है। असल दोषी के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो ही नहीं पाती। य् उस कानून और संविधान का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता, जो लोकतंत्र में जनसेवकों को पंगु बनाए और जनता पिसती रहे।
 
  हो सकता है की जज के इस उद्गार से तंत्र को परेशानी हो , फिर भी बड़ी ईमानदारी से उन्होंने आज के समाज का चित्रण  किया है.-नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती





शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

पेट में के लईको बोले अन्ना - अन्ना. बारह आना देश अन्ना के साथ बा. चार आना में कुछ चोरवे, चिमचे, चुगुले आ कुकुरे बाडन. उहे जन लोकपाल के विरोध करत हवे

  चार आना , आठ आना,बारह आना. पेट में लईको बोले अन्ना - अन्ना. इ हाल बा अपना देश में  भरस्ताचार आ घोटाला के बोलबाला बा . बारह आना देश आना के   साथ बा. चार आना में कुछ चोरवे, चिमचे, चुगुले आ  कुकुरे बाडन. उहे जन लोकपाल के  विरोध करत  हवे. अपना देश में केतना घोटाला भईल , आयी एहू पर नजर दौरावल जा -
   आदर्श घोटाला- इ उ घोटाला ह जेमे  कारगिल की शहीदन की  में नाम पर आदर्श सोसाईटी में एइसन लोग के फ्लेट दियाइल जेकर कारगिल की  लडाई में कवनो योगदान न रहल , एमे कुछ नेता आ कुछ फौजी लोग भर्स्ट तरीका से कारगिल शहीद के परिजन बन गइलन.
२जी spekatramघोटाला-   इ उ घोटाला ह जेमे दूर संचार मंत्री ये राजा तिहाड़ में मज़ा मारत हवे.इ १२३२ लाइसेंस रेवड़ी अईसन बाट के,खूब मलाई चाट के, देश के खोखला कईला में लागल रहलें . 
 राष्ट मंडल घोटाला-   ये घोटाला   के खेलाडी हवे सुरेश कलमाडी . दिल्ली में भएल राष्ट मंडल खेल की तईयारी में ही खेला का दिहलन . अब तिहाड़ में केला  खा ताड़न खीच के.
 यह  तीन चर्चित घोटाला की पहिले देश में कई गो बहु   चर्चित घोटाला भईल.
एकरा  अलावा तोप कि खरीददारी में भी घोटाला भइल . बोफोर्स  तोप सौदा में स्वीडन कि एगो कंपनी  के  ६४ करोड़ क रिश्वत दिहल गईल. बिहार में ९५० करोड़ के चारा घोटाला भईल . एकरा बाद भी देश में बहुत घोटाला भईल . एइसन घोटाला कि बोलबाला वाला युग में भ्रष्टाचार से लड़े खातिर एगो ७४ वरिश के बुजुर्ग ललकार के खड़ा हो गईल . १६ अगस्त २००११ से भर्सताचार की खिलाफ अनसन के घोषणा क के अन्ना आपन अन्नागिरी देखावे लगलन.अन्नागिरी में गांधीगिरी इतना  दम बा। इ देश  देख लिहल ।  अन्ना की साथ पूरा देश एक पैर पर खड़ा बा। उनके इशारा पर  बच्चे,  नौजवान समर्थन में जुटल हवे. चारो ओर अन्ना की  हल्ला  में, गाव-गली - मोहल्ला रमल बा.  अनशन की बल पर सरकार के निहुरावे वाला ७४ वरिश की बुढ के जवानी लौटल बा। पूरा देश अन्ना -अन्ना करत बा. . गाव -गाव अन्ना कि हल्ला में देश में एगो नया क्रांति के मशाल जलल. अन्ना कि आन्दोलन में बुढ- जवान , लईका -सयान सब खड़ा हो गईल . अईसन माहौल में कहल गईल - पेट में के लईका बोले अन्ना -अन्ना .
-N.D. Dehati . gorakhpur

बुधवार, 17 अगस्त 2011

गांव-गली-मुहल्ला, बस अन्ना के हल्ला

17 अगस्त के पहिला बेर अखबार के पन्ना से गायब हो गइलन प्रधानमंत्री। लालकिला की प्राचीर से दिहल भाषन आ स्वतंत्रता दिवस से जुड़ल समाचार भी गायब हो गइल। पंद्रह अगस्त तù स्वाधीनता दिवस रहल, आजादी की जश्न में खूब लहरल तिरंगा लेकिन 16 आ 17 अगस्त के भी देश में तिरंगा के लहरल कम ना भइल। इ असर रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग ऊर्फ दूसरी आजादी की लड़ाई के। एक ओर सरकार व कलमाडी समर्थक त दूसरे ओर अन्ना समर्थक। गांव-गली-मुहल्ला, बस अन्ना के हल्ला। येही हल्ला में हमरा आल्हा गावे के मन कइलसि, तब सुनिलौ पंचों ध्यान लगाय..
गांधी जी अंगरेज भगवलें, जय प्रकाश जुल्मी सरकार। 
अन्ना चच्चा उठवलें मुद्दा,भगाई सभे अब भ्रष्टाचार।। 
अनशन के जब भइल घोषणा, क्रूर भइल यूपीए सरकार।
सात बजे अले सुबह ही, ढाई सौ पुलिस मयूर बिहार।।
जेपी पार्क पर गइला की पहिले, अन्ना टीम भइ गिरफ्तार। 
आक्रोश देश में उबलल, बोललसि टीवी इ समाचार।। 
शिक्षक छात्र वकील जगलें, सोशल साइट मैसेज मार।
यूपी एमपी महाराष्ट्र का, जम्मू असम झारखंड बिहार।। 
अमेरिका में इंडियन पढ़वइया, दूतावास पर डेरा डार। 
उपवास पर बैठ के गरजें, जल्द मिटा दो भ्रष्टाचार।। 
गोरखपुर में नारेबाजी, टाऊनहाल धरना बरियार। 
देवरिया में अधिवक्ता लोग, कइलन कोर्ट के वहिष्कार।।
बस्ती संतकवीर बा जागल, कुशीनगर कहे ललकार।
रहे विरोधी बउरहवा बाबा, उहो समर्थन में तैयार।।
देश में बहल अन्ना के आंधी, चौरंगी बहि गइल बयार। 
बढ़ल दबाव देश की अंदर, घुटना टेक दिहलसि सरकार।।
रिहाई के गइल परवाना, अन्ना कइ दिहलें इनकार।
छीछालेदर कांग्रेस के, थू थू मचल बा गांव जवार।।
चोरवे चुगले चिमचे कुकुरे, मुहं ओरमवले भये लाचार।
अबौ जेकर खून ना खउलल, ओकरा जियला के धिधकार।।

शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

नेवले और सांप की लडाई देखते रह जायेगे , 
 मदारी जंतर बेच के चले जायेगे
बाद में आप पछ्ता के क्या करेगे
भूत-भविष्य और वर्तमान से डरेगे .
  लड़ने वाले नहीं ,मजमा लगाने वाले  है ,पालतू है भीड़ को जुटाने वाले है

रविवार, 7 अगस्त 2011

इकीस दिन में आखिरकार फस गया तेंदुआ


इकीस दिन में आखिरकार फस गया तेंदुआ
गोरखपुर के फर्टिलाइजर खाद कारखाना परिसर में पनाह लेने वाला तेंदुआ आखिरकार 21 वें दिन रविवार को भोर में पिंजरे में फंस गया। गत 11जुलाई  से उसे पकड़ने का प्रयास हो रहा था . अन्ततह ८ अगस्त को वन विभाग को कामयाबी मिली .कई दिनों से भूखे तेंदुए ने बकरी को देखा तो  भूख शांत करने के लिए झपट्टा मारा ,बकरी बेचारी  की जान गयी, लेकिन तेंदुआ फस गया । .नागरिको  को दहशत से मुक्ति मिली।
फर्टिलाइजर के सुरक्षा गार्डो ने भोर में तेंदुआ को पिंजरे में फंसा देखा। समीप ही बकरी मरी पड़ी थी। पिंजरें में बंद हो जाने के कारण तेंदुआ गुस्से में था. सूचना पाकर `डीएफओ ए.पी. त्रिपाठी,रेंजर शैलेन्द्र चतुर्वेदी, रेंजर सुरेश राम, वन दारोगा अमरनाथ सिंह, एसडीओ मूलचंद वन कर्मियों के साथ फर्टिलाइजर पहुंच गए।
जिलाधिकारी संजय कुमार भी मय फोर्स फर्टिलाइजर पहुंच गए। इसके बाद लखनऊ से तेंदुआ को बेहोश करने के लिए डाक्टर की मांग की गयी। शाम करीब पांच बजे लखनऊ से डाक्टरों की टीम व सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग की टीम भी आ गयी। ट्रक पर जरिए क्रेन तेंदुआ को बिना बेहोश किये लादा गया। हालांकि इसमें दो घंटे लगे। वन कर्मियों ने भी काफी मशक्कत की तब कहीं जाकर शाम सवा सात बजे तेंदुआ ट्रक पर लादा जा सका। करीब साढ़े सात बजे तेंदुआ को लेकर ट्रक भारी पुलिस बल व वन कर्मियों के साथ सोहगीबरवा को रवाना हुआ।

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तेंदुआ देखने  उमड़ी भीड़
इक्कीस दिन से रातों की नींद उड़ाने वाले तेंदुआ को भर आंख देखने के लिए क्षेत्र की जनता दिन भर फर्टिलाइजर गेट पर जमी रही। हालांकि शाम तक जमे रहने के बाद भी वह तेंदुआ को नहीं देख पायी और निराश लौटी। शाम सवा सात बजे तेंदुआ ट्रक पर लादा गया । करीब साढ़े सात बजे तेंदुआ को लेकर ट्रक भारी पुलिस बल व वन कर्मियों के साथ सोहगीबरवा को रवाना हो गया . और जनता दूर से तमाशा वीन रही ,उसे तेंदुआ का दर्शन नहीं हुवा .

गदायिल बा मकई

खा मिठू मिया ,गदायिल बा मकई .
अपनी मचान पर , न हवे धनई .

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

गोरखपुर से उड़ा जगुआर मऊ में गिरा , भागलपुर में मचा हल्ला

  देवरिया के पड़ोसी जिले मऊ के मधुबन क्षेत्र में 4/8/11 को जगुआर के दुर्घटनाग्रस्त होने के दौरान हुए धमाके के बाद आतंकी वारदात की आशंका से हर कोई सहम गया। घटनास्थल से 10 किमी की परिधि में जिंदगी की रफ्तार मानो थम गई थी। भागलपुर में शोर मचा की आतंकी बम गिरा रहे है  .  चारो तरफ भगदर मच गयी   . किसी अनहोनी व आतंकी हमले का भय लोगों में समा गया। पता चला   मऊ जनपद के मधुबन थानांतर्गत ग्राम ढिलई फिरोजपुर में दिन के 12.05 बजे अचानक तेज धमाके व आग की उठती लपटों को देखा  गया। जैसे ही लोगों को सूचना मिली कि एयरफोर्स का विमान गिरा है, लोगों की भागदौड़ थमी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के चंद मिनट पहले 3 किमी की दूरी पर ग्राम पहाड़ीपुर के समीप ही विमान से आग की लपटें निकलती दिखीं।  विमान अनियंत्रित होकर पास के ही 33 हजार वोल्ट के विद्युत तार व पीपल के पेड़ से टकराते हुए ढिलई फिरोजपुर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 
यह नियमित अभ्यास उड़ान पर गोरखपुर एयरबेस से उड़ा था . दुर्घटना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ पांडेय और खेत में कम कर रही युवती रूमा (20) की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, पिता नागेश्वर सहनी, मां और एक अन्य बुरी तरह से घायल हो गए हैं।
 दुर्घटना में जान गवाने वाले पायलट सिद्धार्थ पांडेय के पिता अभय नरायण पांडेय आईटीआई मनकापुर गोंडा में वित्त अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। माता रीता पांडेय गृहणी हैं। छोटी बहिन श्रेया उर्फ सांची पांडेय (22) गाजियाबाद से एमबीए कर रही है। सिद्धार्थ माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। सिद्धार्थ ने आईटीआई मनकापुर के सेंट माइकल स्कूल से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की थी। वह वर्ष 2002 में एनडीए में चयनित हुए। 2005 में उन्हें पहली तैनाती भुज गुजरात में मिली। इसके बाद उनका स्थानान्तरण अंबाला कर दिया गया जहां से पांच जुलाई को गोरखपुर स्थानान्तरित कर दिए गए। सिद्धार्थ अभी अविवाहित थे। अभय नारायण पांडेय मूल रूप से इलाहाबाद के अल्लापुर मोहल्ला के निवासी हैं। घटना   के कुछ ही समय बाद हेलीकाप्टर   से पहुचे सेना के जवान पायलट सिद्धार्थ पांडेय का शव लेकर चले गए .
 मधुबन की खबर के साथ
नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती
rastriya sahara , gorakhpur 



गुरुवार, 4 अगस्त 2011

यह है नंदी महाराज

यह है नंदी महाराज . सड़क पर बहुत उत्पात किये , थक गए तो गोरखनाथ थाना में ही बैठ कर पगुरी करने लगे. कितना जिमेदार है नगर निगम .


रउरो में कवनो के सींग कबो धंसी...


रउरी सिद्धान्त पर हमरा हसी आवत बा । रउरा बहुत बड़वर पशु प्रेमी हईं (पता ना मनई से प्रेम ह.. कि ना) रउआ हाईकोर्ट से मुकदमा दर्ज करावत हई । नगर निगम के महापौर अन्जु चौधरी, नगर आयुक्त राजमंगल, पूर्वनगर आयुक्त वीके दुबे सहित तीस लोग पर मुकदमा दर्ज करे के आदेस दिहलसि। आरोप बा कि 2007 की पहिले से लेके अबतक दस हजार गोवंशीय पशुधन के क्रुरता पूर्वक पकड़ के काजी हाऊस में बन्द क... दीहल बा। रउरी पशु प्रेम के बंदगी बा। हकीकत ई बा कि महानगर के सड़कन पर अबहीनों दस हजार से ऊपर की संख्या में छुट्टा जानवर घुमत हवें। हार्न के पों पों बाजत रहे, लेकीन ऊ नन्दी महाराज लोग पगुरी कइला में लागल रहेला। जाम के झाम में भी येह लोग के बहुत योगदान बा। सड़क पर जगह-जगह मुफ्त में कइल गोबर पर जब कौनो चरपहिया के चक्का चढ़े ला त बगल से गुजरत बाइक सवार चाहे पैदलिहा मनई के कपड़ा पोतनहर अइसन हो जाला। सब्जी मार्केटन से आसमान की भाव चढ़ल तरकारी खरीद के बहरियात कवनो माई-बहिन पर के झपट्टा मार के चौपाया गुण्डा चबा जालन त ओह घर में 'रोटी प्याज' के ही आसरा रहि जा ला। शहर के पॉस इलाका में घूमत टहलत कउनो बड़मनई के पिछवाड़ा में सींग लगा के उलाटत शायद रउरा ना देखले हईं। यूनिवर्सिटी परिसर में बिगड़ैल सांड़ जब कउनो छात्रा के चहेंट ले ला अ बेचारी के हाथ से कापी किताब छितरा जा ला। जान बचावल मुश्किल हो जाला ओह दृश्य के रउरा ना देखले होखब। कबो कबो सड़क पर सांड़न के जंग अ खुरचारी दौड़ में राहगीर भी गंतव्य तक ना पहुंच के अस्पताल पहुंच जा ला। अइसन बहुत उदाहरण बा जवना से पशु के प्रति प्रेम ना जागि सकेला। शहर के चर्चित चितकबरा, कनटूटा, लंगड़ा, भुंवरा, काना, कैरा, गोला, घवरा में कवनो से रउरा प्रेम ना देख सकेलिन। इ कवनो आतंकवादिन से कम ना हवें। रउरा बहुत बड़वर पशु प्रेमी होइब, हम ना जानत हईं। लेकिन अपना आहाता में केतना बीमार, अचलस्त गोवंशी के दवा-दारू, खरी भूंसा के इंतजाम कइले हईं एहुके खुलासा क के समाज के सामने रख दीं। पशु, पशु होलें। मनई के प्रति प्रेम भाव देखाईं। जवन पशु खूंटा से बन्हि के ना रहेलन उ अवारा कहल जालन। उनकर असली जगह जंगल ह। जहां जंगलराज चलेला। गोरखपुर शहर ह, महानगर ह। एइजा नगर निगम के भी कुछ नियम बा। नागरिकन की सुरक्षा खातिर यदि अवारा पशुन पर डंडा चलता त कवनो बाउर नेइखे होत। अबे बहुत ढीलाई बा। अगर सही में अवारा पशु काजी हाउस में बंद रहितन त सड़क पर ना दिखतन। आंख खोलीं, सड़क पर जानवरन के 'डाराज' देखीं, ओकरा बाद कवनो मनई पर मुकदमा ठोंकीं। हमरा त रउरी येह सिद्धांत पर आवता हंसी, रउरो में कवनो के सींग कबो धंसी।।

एन. डी. देहाती

सर्व शिक्षा अभियान कù सपना..



सर्व शिक्षा अभियान की नाम पर सरकार बहुत पइसा ठेलले बा। एकरा बावजूद भी सरकारी स्कूलन में पढ़ाई लिखाई में सुधार ना भइल। एगो पत्रकार भाई सरकारी स्कूल पर पहुंच गइलें शिक्षा-दीक्षा के जायजा लेबे। माट साहब का बर्दास्त ना भइल। सब बात भोजपुरी कहावत में कहि दिहलें- सरकार के मिड डे मील, स्कूल के खिचड़ी। उ खिचड़ी जवना के चार यार, दही पापड़ घी अंचार। एइजा चारों के अकाल। प्रधानजी लोग की हाथे सब व्यवस्था बा। दाल के पानी, पियरका रंग, खींचे लक्ष्के माड़े संग। इहो रोज ना बनत बा। कबो घानी घना, कबो मुट्ठी चना, कबो उहो मना। अबरे के मेहरारू गांव भर के मौजाई के हाल बा। जेही स्कूली पर आवता धमका के चलि जाता। लक्ष्का लोग करिया अक्षर भइंस बरोबर भले ना जनलें थरिया लेके पहुंच जात हवें। स्कूल के हाल उ बा सेतिहा के साग गदपुरना के भाजी। नेटा बहावत, जंघिया सरकावत लक्ष्के चलि आवत हवें। प्रधान जी आन की धन पर कनवा राजा भइल हवें। पांच गो रसोइया तैनात क देले हवें। बुढ़वा भतार पर पांच टिकुली। सजो मजा प्रधान जी मारत हवें, आ चेकिंग -ओकिंग में तनख्वाह कटत बा मास्टरन के। खेत खाए गदहा, मारल जाव जुलहा। हम तù गइयों हूं, भइसियों हूं। दस्कतिये ले हाथ बा। कोदो देके ना पढ़ले हई लेकिन हई जवन दूसरे के कमाई पर तेल बुकवा लगत बा, भगिमाने के भूत हर हांकत बा। गांव वाला चुन के बइठा देले हवें अइसन बेह्या के की ओकरा पीठी रुख जामल, उ कहे कि छांह भइल। चार आना के जोन्हरी चौदह आना के मचान। लक्ष्कन के ठेकाने नेइखे आ भवन पर भवन बनवाबति बा सरकार। गांव वालन के हाल उ बा कि एक तù बानर दूसरे मरलसि बिच्छी। तोहं लोगन फोटो खींचे चलि आवत बाड़ù आ पूरा गांव तमाशा देखे बटुरा जात बा। जेतने मुंह ओतने बात। देश में चारों ओर भ्रष्टाचार बा लेकिन तोहं लोगन का इसकूलिए लउकत बा। मुर्गी गइली बंसवाड़ी, बुझली वृंदावन आ गइली। इ शिक्षा विभाग अथाह बा। बड़- बड़ ऊंट दहाइल जा , गदहा पूछे केतना पानी। माट साहब के बात सुनि के पत्रकार भाई मुसकी मारत चलि दीहलें। पाड़े बाबा क  कवित्तई चालू हो गइल-
गुरुजी समायोजन में, शिक्षा मित्र आंदोलन में। चूल्हाभाड़ में गइल पढ़ाई, लईका  जुटलें भोजन में।। गांव-गांव स्कूल खुलल, पइसा आइल एतना। ना सुधरल, कब सुधरी,सर्व शिक्षा कù सपना।।
- नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती 
रास्ट्रीय सहारा , गोरखपुर

मंगलवार, 2 अगस्त 2011

पुलिस बिकवाती दारू ,विरोध करें मेहरारू




गोरखपुर के इमानदार कहे जाने वाले आईजी विजय कुमार अपने बेईमान सिपाहिओं को कब ठीक करेंगे.
महिलाओं ने गोरखपुर के  खोराबार पुलिस और कच्ची शराब के कारोबारियों के बीच हुई साठगांठ की पोल खोलकर  रख दिया .पुलिस वसूली में लगी रही तो पहली अगस्त को महिलाओं ने कच्ची  के कारोबारियों को पस्त कर दिया . महिलाओं द्वारा की गई कार्रवाई में 5 कुंतल महुआ लहन नष्ट किया गया जबकि 1000 लीटर कच्ची शराब बरामद की गई। आबकारी के लोग का साडी पहिन ले  .अपाची सिपाही केवल मुद्रा बिमोचन में लगे है . औरतो की बहादुरी सून  आईजी  ने  थानेदार को फटकार लगाई तो उन्होंने  एक कारोबारी को गिरफ्तार किया।  जंगल सिकरी गांव की श्रीमती सुभावती देवी, श्रीमती इंद्रावती, श्रीमती मीना, श्रीमती सोनारी, श्रीमती चंद्रावती, श्रीमती नर्मदा, श्रीमती रेशमी देवी, श्रीमती गेंदा, श्रीमती राजपति समेत सैकड़ों महिलाओं ने आज सुबह फुर्सतपुर चौराहा स्थित कच्ची शराब के कारोबारियों राजाराम निषाद, उसकी पत्नी, कोइल व उसकी पत्नी, सदाबृक्ष उर्फ कोइल पुत्र हरिद्वार के कच्ची शराब के अड्डों पर छापेमारी की। महिलाओं ने 1000 लीटर कच्ची शराब बरामद की। महिलाओं ने  खोराबार पुलिस के विरुद्ध नारेबाजी शुरु की। इतना ही नहीं महिलाओं ने इसकी जानकारी आईजी रेंज विजय कुमार को दी। आईजी की फटकार पर मौके पर पहुंचे थानेदार विनय कुमार पाठक ने लहान को नस्ट कराया

अब आप बताईये गोरखपुर की पुलिस को चूड़ी  पहन कर घर में बैठ जाना चाहिए की नहीं ? आबकारी  के लोगो को  साडी पहन लेना चाहिए  की नहीं ? और महिलाओं में ऐसे ही जागरूकता रही तो पुलिस की शह पर चल रहा कच्ची  शराब का कारोबार बंद हो जायेगा की नहीं ?
 
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