सोमवार, 3 जनवरी 2011

जवन भइल बढ़िया भइल, जवन होई उहो ठीक होई


सब आशंका निरमूल हो गईल। जवन भइल बढ़िया भइल। आगे जवन होई उहो ठीक होई। अयोध्या की फैसला पर इहे कहल जा सकेला। सब जीत गइल। केहू के हार ना भइल। दुनिया के सबसे बड़ मुकदमा पर फैसला आइल। सब स्वागत कइल। फैसला में कहल गइल कि जहां विराजमान हवें उहें रहिहे रामलला। मतलब रामललावादी लोग के भी जीत हो गइल। निरमोही अखाड़ा जीत गइल। विवादित जमीन के एक तीसरी ओहु के मिल गइल। हिन्दू महासभा जीत गइल, गर्भ ग्रह में ही रहिहन रामलला। सुन्नी वक्फ वोर्ड भी जीत गइल। एक तीसरी जमीन ओहू के मिली। भाजपा जीत गइल, काहें कि ओकर मुद्दा ‘राममंदिर’ कायम रहल। कांग्रेस जीत गइल, काहें कि ताला खोलववला से लेके ढ़ांचा ढ़हववला ले केन्द्र में ओही के सरकार रहल। प्रशासन जीत गइल, कि एतना बड़वर फैसला की बाद भी एगो ‘पत्ता’ ना खरकल। जवन भइल बढ़िया भइल।
     अयोध्या फैसला पर जेकर प्रशंसा कइल जा, ओहमें सबसे उपर बा ‘संयम’। सब लोग संयम से काम लिहल। उन्मादी लोग भी संयम से रहल भले प्रशासन की डंडा की ही बदौलत। प्रशासन के डंडा भी संयम में रहल, अनावश्यक ना चलल। इ एगो बड़वर परीक्षा के घड़ी रहल। येह परीक्षा में सब पास हो गइल। हिन्दुस्तान क अमन, शांति, भाईचारा, एकता बनल रहल, बनल रहो।
   देश की आन-मान सम्मान पर कवनो आंच ना आइल, एकरा खातिर देश के करोड़ो अमन पसंद लोगन के लाख-लाख प्रनाम। उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार के भी सराहना होखे के चाहीं। अयोध्या विवाद के लेके सरकार कवनो अशांति ना पैदा होखे दिहलसि। जरूरत एह बात के बा कि इ सजगता आगे की दिनन में भी बनल रहो। गांव की एगो निपट जपाट आदमी से जब पूछलीं कि- ‘काहो गबड़ू काका अयोध्या फैसला से खुश हव..’ उ टप्प से कहलें- ‘बाबू जवन भइल, बढ़िया भइल।’ गबड़ू काका की बात में दम रहल, कहलन येह समय एक ओर से ललकारे वाली सपा चुप्प बा त सब ठीके बा। बाबू, बवाल के चाहत बा। इ त नेतवे आग लगवा दे लें। केतना शांति से निकर गइल एतवर बड़वर ममिला, जीवन में कबो ना देखलीं ना सुनलीं।
     गबड़ू काका की बात की दम पर हमहू कहत हईं जवन भइल बढ़िया भइल, जवन होई उहो ठीक होई। सबके सनमत दें भगवान।

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