इनकर लहंगा उठी अब रिमोट से...
मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। होली आईल बा। मन फगुआईल बा। बाबा लोग भी बब्बर हो गईल बा। मुंहे के जब्बर हो गईल बाड़न। भंग के रंग अइसन चढ़ल बा कि एगो भगवा दूसरका भगवा के भगही खोल के नंगा कईला में लागल बा। चारों ओर से सनातन पर हमला बा। इ हमला कवनो चेकदार हरियर लुंगी वाला ना, नारंगी लुंगी वाला ही कईले बाड़न । जेतना धर्म के ठेकेदार लोग बा, मुंह में दही जमा के मौनी बाबा बनल बा लोग। ठट्ठा उड़त बा। लुग्गा लुटाता। इज्जत बांस की पुलईं टंगा गईल बा। केकर- केकर नाम लेई, जईसन उदई ओइसन भान...।
विश्व में रंग के ना बारूद के होली होता। अमेरिका आ इजराईल दुनो ईरान पर हमला सत्तर जने के होलिका जला दिहलेँ। पिचकारी के बात छोड़ी मिसाईल के बात बतिआईं। मौत के मातम की बीचे आंध्र प्रदेश में पटाखा फैक्ट्री में अस पटाखा दगल की 21 जने मर गईलेन। सब मजूर रहलें। रोटी खातिर मजबूर रहलेन। केहू हजूर थोड़े मरल बा की नेता लोग का कवनो दुख होई।
देश में यूजीसी पर बोलला में सवर्ण नेता लोग का लाज लागत बा। कुछ बाबा लोग बोलत बा। जेईसे लखनऊ में शनीचर की दिने ब्राह्मण महासभा की बैठक में मिसिर, पाठक, अग्निहोत्री, पांडेय त पक्ष -विपक्ष में बेसी बेसी बोल दिहल लोग लेकिन जब शर्माजी बोले खड़ा भइलें त अस लिहो लिहो भईल की लगल होली आ गईल। बाभन देवता लोग त पहिलहि से शंकराचार्य बाबा की विवाद पर भितरे भीतर डहुरत बा लोग ऊपर से आयोजन के मुखिया त्रिपाठी प्रबुद्ध समागम की नाम पर लोग के जुटान करा के सवाल खड़ा क दिहलेँ कि शंकराचार्य की अपमान पर सरकार संज्ञान काहे नईखे लेत? पाठक दावा करते रहि गईलेन कि सरकार ब्राह्मण समाज क़ी साथे बा, लेकिन बाबा लोग के अखियाँ लाले लाल, अखिया लाले लाल...। भईल बवाल। नारेबाजी से लगल कई जने नेता लोग क़ी पैजामा के नाड़ा ढील हो जाई। अब त सब गावत बा -इनकर लहंगा उठा देईब रिमोट से..।
फेरू मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते रफ्ते...