गुरुवार, 9 मई 2013

माहिल, मारिच, कंस आ शकुनी मामा के प्रकार..

मनबोध मास्टर की दिल में मामाजी के प्रति अगाध श्रद्धा रहल। अपनी बतकही में बेर-बेर मास्टर इ बात दोहरावत रहलें कि एक अक्षर की ‘ मां ’ से जब एतना प्रेम त डबल अक्षर के ‘मामा’से दूना भावनात्मक लगाव रहे के चाहीं। मास्टर की विचार से ठीक उल्टा हमार विचार बा। इतिहास गवाह बा, मामाजी लोग के चेहरा खलनायकीवाला ही बा। मामाजी लोग के अंत की पीछे भांजा लोग की योगदान के भी ना भुलाइल जा सकेला। त्रेतायुग में एगो मामा रहलन मारिच। भेष बदलला में माहिर रहलन। रावण की मति में पड़ के अस सोने के मृग बनलन की रामजी की हाथे गति बन गइल। मरते दम भांजा की कार्यसिद्धि खातिर हाय लक्ष्मण! हाय लक्ष्मण! के आवाज लगा के भ्रम की भंवरजाल में सीता सती के फंसा दिहलन। द्वापर में एगो क्रूर आ आ घटिया टाइप के मामा भइलन कंस। अपनी ही बहन-बहनोई के जेल की कालकोठरी में डाल के पैदा होते ही भांजी- भांजन के हत्या करत रहलें। भला भइल कन्हैया के की अवतार होते ही सब लोग नींदासन में आ गइलें आ भांजा नंद की यहां पहुंच गइल। मामाजी के मार के नाना ऋण के उदृण हो गइलन। येही युग में पैदा भइलन एगो धुर्त मामा। नाम रहल शकुनी। अस मकुनी पकवलसि की भाजंन के भड़का के महाभारत करा दिहलसि आ हस्तिनापुर के नाश करा दिहलसि। जे आल्हा सुनले होई उ कुचरा मामा माहिल के दास्तान सुनले होई। उहो खलनायक ही रहल। मामा आदर की जगह जब गाली के शब्द भइल त ट्रेन में बेटिकट यात्रा करे वाला पढ़वइया लरिकन की मुंह से टीटी के ममवा कहत सुनल गइल। आपराधिक प्रवृत्ति के लंठ वर्दीधारिन के ममवा कहत सुनल गइलन। आजकल एगो और मामा के जगह-जगह र्चचा बा। भांजा की करनी से रेल मंत्री के उप नाम मामा हो गइल। रेल मंत्री पवन बंसल के मामा बनवला में भांजा विजय सिंगला के बहुत योगदान बा। येह देश के मामाजी लोगन से बचवला के जरूरत बा। मामालोग चंदामामा जइसन प्यारा मामा ना रहल। उ माहिल, मारिच, कंस, शकुनी आ पवन बंसल टाइप के हो गइल बाड़न। देश के दुगो बड़वर राजनीतिक दल पीएम पद के जवन उम्मीदवार बनावत हवें, बेशक उ मेहरीविहीन हवें , संतानहीन हवें लेकिन भांजा-भांजी त जरूरे होइहन। सो हे पंचों! येह देश के मामा -भांजन से बचाइब सभे। बहुत सोच-समझ के चुनब सभे ना त फिर बैताल ओही डाल। एगो चार लाइन के कविता देखीं-
 माहिल मारिच कंस आ शकुनी, मामा के प्रकार।
 एक भांजा की कारने, मामा भयो लाचार।।
 मामा के मुंह लागल कालिख, भांजा खइलसि घूस हजार।
 बांसे लुग्गा टंगाइल बाटे, सांसत में मौनी सरकार।।
- Narvdeshwar pandey dehati ka yah bhojpuri  vyngy rashtriy sahara ke 9/5/13 ke ank me prkashit hai .

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