गुरुवार, 24 जनवरी 2013

हाय हाय रे हिना रब्बानी, सुघ्घर शक्ल, जहरीली बानी.....

राष्ट्रीय सहारा के 24/1/13 के अंक में छपा मेरा भोजपुरी व्यंग्य


मनबोध मास्टर ठंड की दोहरावन में भी गरम हवें। मास्टर के गरम भइला के कई ठो कारन बा। कबो हिना रब्बानी की सुघ्घर शक्ल सूरत पर फिदा रहे वाला मास्टर के रब्बानी के बानी परेशानी में डाल देले बा। मास्टर का एतराजी बुखार पहिलहीं से रहे तबले अपना गृह मंत्री जी के हिंदू आतंकवाद और चांपि दिहलसि। साथ में सलमान के बयान से ‘ टायफायड’ हो गइल। अब मास्टर उन्माद में बोलत हवें त लोग कहत बा बेमारी बिगड़ गइल बा। बहरहाल हम मास्टर से मिलली, आ हाल-चाल, कुशल-क्षेम पूछलीं। उ ज्वालामुखी अइसन फाट पड़लें। बोललें- हऊ देखù हिना रब्बनिया के, बबुनिया के भारतीय सीमा से यद्धोन्माद देखाई देत बा। हमार सहनशील देश पिछला 65 साल से बदमिजाज आ अविश्वसनीय पड़ोसी से पहुंचावल पीड़ा से पीड़ित बा। हम लगातार चोट पर चोट खात हई लेकिन वोट की राजनीति के चलते सब सहत जात हई। नापाकी की दिल दिमाग में कहीं शांति के ढाई आखर कहीं चस्पा ना बा। हम सहनशीलता की वीरता में कवले अउअल स्थान लेत रहब। कवले ‘ ईट के जवाब पत्थर से ’ वाला जुमला के जुगाली करत रहब। अरे ओकर हाल त कुक्कुर के पोंछि अइसन बा। विश्व के कवनो नली में ओकर पोंछि डाल के गरमावल जा तबो सीधा ना हो सकेला। एके दवा बा पोंछि काट के पोंछिकट्टा बना दिहल जा। लेकिन जब घर ही कलह रही त पड़ोसी से कइसे निबटल जाई। इ सांच बा कि आतंकवाद के कवनो धरम आ रंग ना होला लेकिन हमरी देश के गृहमनिस्टर की चश्मा के कमाल देखीं। उनका हिंदू आतंकवाद आ केसरिया आतंकवाद ही लउकत बा। एक महीना में 12 बेर सीमा पर पड़ोसी गुंडई कइलसि, शिंदे साहब की आंखि से ना लउकल। शिंदे की बानी से परेशानी रहवे कइल तवले सलमान साहब भी राग में राग मिला दिहलें। वाह रे! मतिमंद, बिना मात्रा के छंद। दुश्मन मुड़ी काट ले जा त कवनो बात ना, घर में केहू करेड़ बोल दे त बाउर। बहस के समय ना बा। कार्रवाई के जरुरत बा। अब कवनो विकल्प नेइखे बचल। भारतीय सेना के पूरा छूट दे दिहला के आवश्यकता बा। हमहूं जता दीं ‘ जोर केतना बाजुए कातिल में है।’ अगर ढाई अक्षर के शांति से काम ना चलत होखे त ढाई अक्षर के ही युद्ध होखे के चाहीं। पाकिस्तानी विदेश मंत्री हिना रब्बानी, सुशील शिंदे हिंदुस्तानी की बयान पर इ कविता-
हाय हाय रे हिना रब्बानी, विदेश मंत्री पाकिस्तानी।
मोहतरमा का नाहीं सुझाला, सीमा पार के कारस्तानी।।
हमरा देश के गृह मनिस्टर, बोल रहल बा अइसन बानी।
सुनके अचरज लगे देहाती, भयो काहें ना पानी-पानी।।

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