रविवार, 4 जनवरी 2026

4 जनवरी 2026 की स्वाभिमान जागरण के अंक में प्रकाशित

ई -दई घाम करs, सुगवा सलाम करs...

मनबोध मास्टर पूछलें -बाबा! का हाल बा। बाबा बतवलें-हाल बहुते बेहाल बा। धुंध छवले बा, कुहेसा पड़त बा। शीतलहर चलता। लइकाई में गावत रहलीं जा - "दई -दई घाम करs, सुगवा सलाम करs...तोहरी बलकवा के जड़वत बा। पुअरा फूंकी फूंकी तापत बा।"आजकल पुअरा त खेतवे में धान कटते फूंका जाता। पूस-माघ के महीना में लवना, लेहना, तेवना तीनों के अकाल चलत रहे। अब समय बदल गईल। कबो जमाना रहल, हम्मन के पुरखा पुरनिया गुलाम रहल। आजादी की लड़ाई में अपनी नगर के बहुत योगदान रहल। खजड़ी वाला भागवत भगत ज़ब गावत रहलें -गेहूआ के रोटिया रहरिया के दलिया तनी घियुवा मिलिहे ना, जब अइहे अजदिया तानि घियुवो मिलिहे ना। देश आजाद भईल त लोग एतना आजाद भईल की सड़क आ रेल लाइन की किनारे कवनो सरकारी जमीन पर मंदिर, मस्जिद, मजार बना के आपन आपन   समराज्य फैलावल शुरू कईलेन। अपना नगर में भी अइसही एगो जमीन पर मरला की बाद एक जने दफना दिहल गईले। उ भले जमीन में दफ़न रहलें उनकर साम्राज्य बढ़त गईल। सत्तर बरिस में क़ब्र पर आस्था के मेला आ मनौती की बहार में कब्र मजार बन गईल। मजार पर मन्नत की मंगन में हिन्दू मुसलमान सब बटोरात रहलेन। मजार की जमीन के विवाद में नगीना पहलवान मरा गईलन। समय बदलल। सियासी माहौल बदलल। अब गाड़ल मुर्दा उखाड़ शुरू भईल। जड़ खोजाईल त जमीन सरकारी निकलल। मजार पर लागे वाला मेला पर प्रतिबंध लाग गईल। येह साल कवनो दउरी दोकान प्रशासन ना लागे दिहलसि। जवना जगह पर मेला के रेला लागत रहे ओहिजा खाली पुलिस के झमेला देखल गईल। कागज़ पत्तर में मजार से बंजर दर्ज हो गईल। 
नेताजी जंग छेड़ देले बाड़न। जमीन बंजर बा त मजार पर बुलडोजर चलावे के मांग करत बाड़न। भीषण ठण्ड में माहौल गरम बा। ना जने कहिया दइब उगिहे। उजियार होई। लेकिन अबे मौसम में ही ना प्रशासनिक अमला में भी धुंध छवले बा। ठंड घेरले बा। लोग किकुरल बा। अब पता न इ दईब के एजेंडा ह की राजनीति के प्रोपोगंडा ह, लेकिन कुछ त ह। 
फेरू मिलब अगिला हफ्ते, पढ़ल करीं रफ्ते रफ्ते...

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